नाहन : ऐतिहासिक शहर नाहन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां का आपसी भाईचारा किसी छोटी गलतफहमी से टूटने वाला नहीं है। मोहल्ला गोविंदगढ़ और वाल्मीकि नगर के बीच गेट को लेकर उपजा विवाद पथराव तक पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद दोनों समुदायों ने जिस परिपक्वता का परिचय दिया, वह पूरे प्रदेश के लिए एक सीख है।
इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती तब आई जब बाहरी राज्यों से कुछ लोग बयानबाजी कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने लगे। लेकिन नाहन के लोगों ने समझदारी दिखाते हुए साफ कर दिया कि यह शहर का आपसी मामला है और इसका हल भी यहीं निकलेगा। दोनों पक्षों के लोगों ने वीडियो संदेश जारी कर बाहरी लोगों से नाहन न आने और मामले को तूल न देने की अपील की।

स्थिति तब और संवेदनशील हो गई थी जब बाहरी राज्यों से लोगों के आने की खबरें आईं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर क्षेत्र में BNSS की धारा 163 लागू कर सुरक्षा बढ़ा दी । मगर पंजाब से आए प्रतिनिधियों ने भी टकराव के बजाय शांति का रास्ता चुना। वाल्मीकि तीर्थ अमृतसर के महासचिव बिल्लू वाल्मीकि और बुड्ढा दल मोहाली के जत्थेदार अवतार सिंह ने भड़काऊ बयानों से बचते हुए सौहार्द की अपील की। उनका यही सकारात्मक रवैया शांति की सबसे बड़ी वजह बना।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे सुखद पल तब आया जब दोनों समुदायों के प्रतिनिधि एक साथ पत्रकार वार्ता में बैठे। जहां टकराव की आशंका थी, वहीं दोनों पक्षों ने आपसी गलतफहमी के लिए खेद जताते हुए भाईचारे का संदेश दिया।
हालाँकि सुरक्षा के मद्देनज़र प्रशासन ने धारा 163 लागू कर कड़ी नाकाबंदी की थी, लेकिन नाहन में शांति बनाए रखने का असली श्रेय यहाँ के नागरिकों की समझदारी को जाता है। नाहन के लोगों ने दिखा दिया कि बाहरी दबाव और अफवाहों के बीच भी अगर नीयत साफ़ हो, तो हर विवाद को बातचीत से सुलझाया जा सकता है।