नाहन : पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्र के ग्रीन कवर को तेजी से बढ़ाने के उद्देश्य से रोटरी क्लब नाहन संगिनी द्वारा एक अनूठी एवं अनुकरणीय पहल की गई है। इस विशेष अभियान के तहत सिरमौर जिले के जमटा के समीपवर्ती क्षेत्र बरमन में जापानी मियावाकी तकनीक के आधार पर ‘मिनी सघन वन’ विकसित करने के दृष्टिकोण से 100 पौधे रोपे गए। यह संपूर्ण पौधरोपण कार्यक्रम डीएफओ नाहन के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जबकि अभियान को धरातल पर सुचारू रूप से लागू करने, स्थल तैयार करने और गड्ढे आदि की व्यवस्था संभालने में होमगार्ड के जवानों का भी विशेष एवं सराहनीय योगदान रहा।
इस पौधरोपण की सबसे मुख्य विशेषता यह रही कि इसे आधुनिक इको-फॉरेस्ट्री और प्रसिद्ध मियावाकी पद्धति के वैज्ञानिक सिद्धांतों के तहत डिजाइन किया गया है। इस तकनीक के अंतर्गत सीमित क्षेत्र में केवल स्थानीय जलवायु व वातावरण के अनुकूल (Native) पौधों का चयन कर उन्हें काफी पास-पास रोपा जाता है। इस सघनता के कारण पौधों के बीच सूर्य का प्रकाश पाने की प्राकृतिक प्रतिस्पर्धा उत्पन्न होती है, जिससे ये सामान्य पौधरोपण की तुलना में लगभग 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं। यह मियावाकी मॉडल पारंपरिक जंगलों की तुलना में 30 गुना अधिक घना होता है और महज दो से तीन वर्षों के भीतर पूरी तरह आत्मनिर्भर व जैव-विविधता से भरपूर घने जंगल में तब्दील हो जाता है।

इस मियावाकी सघन वन की संरचना को बहुस्तरीय बनाने के लिए स्थानीय पारिस्थितिकी, औषधीय और फलदार गुणों से भरपूर विविध देसी प्रजातियों का चयन किया गया। अभियान के दौरान मुख्य रूप से आंवला, अनार और बाण (ओक) के अलावा कई अन्य उपयोगी स्थानीय पौधे रोपे गए। जहाँ आंवला और अनार जैसे फलदार पौधे स्थानीय पक्षियों व वन्यजीवों के लिए भोजन का प्राकृतिक चक्र तैयार करेंगे, वहीं बाण के वृक्ष पहाड़ी ढलानों पर भू-स्खलन रोकने, मिट्टी की नमी बनाए रखने और भूजल स्तर को रिचार्ज करने में अत्यंत मददगार साबित होंगे।
कार्यक्रम के दौरान रोटरी क्लब नाहन संगिनी की पदाधिकारियों व सदस्यों ने पर्यावरण सुरक्षा पर बल देते हुए कहा कि मियावाकी तकनीक के माध्यम से विकसित यह वन क्षेत्र के सूक्ष्म-जलवायु को सुधारने और कार्बन अवशोषण को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा। क्लब सदस्यों ने केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहकर रोपे गए सभी 100 पौधों की नियमित सिंचाई, मल्चिंग, घेराबंदी और देख-रेख का संकल्प लिया ताकि यह मिनी फॉरेस्ट सफलतापूर्वक विकसित हो सके। अंत में रोटरी संगिनी टीम ने वन विभाग और होमगार्ड के जवानों का आभार व्यक्त किया तथा आम जनता से भी अपने आसपास की खाली जमीनों पर मियावाकी पद्धति से स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने की अपील की।