नाहन नगर परिषद चुनाव : बिना वोटिंग के ही स्थगित हुई बैठक, जानिए क्या रही वजह

नाहन : नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए होने वाला बहुप्रतीक्षित चुनाव एक बार फिर अधर में लटक गया है। लंबे समय से इस चुनावी घड़ी का इंतजार किया जा रहा था, लेकिन ऐन वक्त पर भी राजनीतिक तस्वीर साफ नहीं हो सकी। बैठक के लिए तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी कोरम (न्यूनतम आवश्यक सदस्य संख्या) पूरा नहीं हो पाया, जिसके चलते कार्यवाहक एसडीएम एवं तहसीलदार उपेंद्र को चुनावी प्रक्रिया को आगामी तारीख तक के लिए स्थगित करने का आधिकारिक फैसला लेना पड़ा।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प पहलू भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों की रणनीति रही, जो इस महत्वपूर्ण बैठक से पूरी तरह दूर रहे। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सुबह साढ़े ग्यारह बजे तक भाजपा खेमे के सदस्यों का इंतजार किया गया, परंतु उनके न पहुंचने से चुनावी मुकाबला फिलहाल टल गया। भाजपा की इस दूरी ने स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस वॉकआउट के पीछे की मुख्य वजह अध्यक्ष पद के चेहरे को लेकर पार्टी के भीतर चल रही आपसी खींचतान और असमंजस की स्थिति है। दरअसल, भाजपा के पास इस समय पांच महिला पार्षद हैं और पार्टी आलाकमान अब तक किसी एक नाम पर आम सहमति बनाने में नाकाम रहा है। हालांकि रेस में संध्या अग्रवाल, पूजा तोमर और सीमा अत्री के नाम सबसे आगे चल रहे थे, लेकिन किसी अंतिम निर्णय पर न पहुंच पाने के कारण पार्टी ने जल्दबाजी करने के बजाय समय लेना ही बेहतर समझा।

अगर नगर परिषद के भीतर संख्या बल के समीकरणों को देखें, तो 13 पार्षदों वाले इस सदन में मुकाबला बेहद कड़ा और बराबरी का है। कागजी तौर पर भाजपा के पास 7 पार्षदों का समर्थन हासिल है, जबकि कांग्रेस के पाले में 6 पार्षद हैं। लेकिन स्थानीय विधायक अजय सोलंकी के मताधिकार को जोड़ते ही कांग्रेस का आंकड़ा भी बढ़कर 7 पहुंच जाता है। ऐसे में दोनों ही प्रमुख दलों के पास बराबर की ताकत है, जिससे मुकाबला पूरी तरह फंसा हुआ है। इसी चुनौती को भांपते हुए कांग्रेस ने चुनाव से ठीक पहले अपनी सोची-समझी रणनीति के तहत पत्ते खोल दिए थे। कांग्रेस ने अध्यक्ष पद के लिए उपमा धीमान और उपाध्यक्ष पद के लिए अपने वरिष्ठ पार्षद योगेश गुप्ता को उम्मीदवार घोषित कर एक मजबूत संदेश देने की कोशिश की थी, लेकिन कोरम के अभाव में उनका यह दांव फिलहाल अगली बैठक तक सुरक्षित रह गया है।

अब इस पूरे राजनैतिक ड्रामे का अगला अंक 24 जून को सुबह 11 बजे तय की गई बैठक में देखने को मिलेगा। इस आगामी बैठक की खास बात यह होगी कि इसमें चुनाव ‘साधारण बहुमत’ के नियम के आधार पर कराया जाएगा। इस नियम के तहत कोरम की बंदिशें खत्म हो जाती हैं, जिसका सीधा मतलब यह है कि यदि कोई दल रणनीति के तहत अनुपस्थित भी रहता है, तब भी सदन में मौजूद सदस्यों की संख्या के आधार पर ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का फैसला कर दिया जाएगा।

बेशक इस खींचतान के बीच जो भी नया नेतृत्व सत्ता संभालेगा, उसके लिए आने वाला समय बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाला है। प्रदेश में जल्द ही विधानसभा चुनावों की सरगर्मियां तेज होने वाली हैं, जिसके चलते नगर परिषद की यह कुर्सी विकास कार्यों की भारी उम्मीदों, भारी राजनैतिक दबाव और जनता की आकांक्षाओं के बीच किसी कांटों के ताज से कम साबित नहीं होगी। फिलहाल नाहन की जनता और राजनैतिक गलियारों का इंतजार बढ़ गया है और सबकी नजरें अब 24 जून की बैठक पर टिकी हैं।

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पंकज जयसवाल

पंकज जयसवाल, हिल्स पोस्ट मीडिया में न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 2 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह समाज सेवी संगठनों से जुड़े रहे हैं और हजारों युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा देने के साथ साथ रोजगार दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।