सोलन: राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) परियोजना के तहत डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय द्वारा वोकेशनल ट्रेनर्स के लिए एक विशेष तीन दिवसीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों से आए कुल 49 वोकेशनल ट्रेनर्स ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को व्यावसायिक शिक्षा से जुड़ा आवश्यक ज्ञान, व्यावहारिक कौशल और प्रभावी शिक्षण तकनीकों से पूरी तरह अवगत कराना था।
प्रशिक्षण के प्रमुख आयाम और प्रायोगिक गतिविधियां
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों को एनएसक्यूएफ परियोजना के अंतर्गत विभिन्न मदों में उपलब्ध धनराशि के उचित और पारदर्शी उपयोग, बाग प्रबंधन, उन्नत फल उत्पादन, वैज्ञानिक कटाई-छंटाई एवं कलम लगाने की आधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया गया। इसके साथ ही, फल एवं सब्जी फसलों में लगने वाले रोगों व कीटों के प्रभावी प्रबंधन तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न व्यावसायिक अवसरों की जानकारी भी प्रदान की गई।
इस प्रशिक्षण को पूरी तरह व्यावहारिक स्वरूप देने के लिए प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय की फल प्रसंस्करण इकाई, पुष्प उत्पादन प्रयोगशाला और नवाचार एवं उद्यमिता केंद्र का विशेष भ्रमण करवाया गया। इस दौरान उन्हें खाद्य प्रसंस्करण, व्यावसायिक फूलों के वैज्ञानिक प्रबंधन, मशरूम उत्पादन तथा उद्यमिता से जुड़ी तमाम गतिविधियों की जमीनी हकीकत से रूबरू कराया गया। इसके अतिरिक्त, कार्यस्थल आधारित प्रशिक्षण, करियर मार्गदर्शन, रोजगार मेले और कौशल बोध कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार तथा उद्यमिता के अवसरों के प्रति जागरूक करने के तौर-तरीकों से भी ट्रेनर्स को अवगत कराया गया। इस पूरे कार्यक्रम का सफल समन्वय डॉ. मीना कुमारी द्वारा किया गया, जबकि सह-समन्वय की जिम्मेदारी डॉ. दिव्या चौधरी ने निभाई।
समापन समारोह और निदेशक के विचार
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. धर्म पाल शर्मा ने बतौर मुख्य वक्ता अपने संबोधन में कहा कि आज के आधुनिक दौर में कौशल विकास देश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सबसे अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रकार के गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से वोकेशनल ट्रेनर्स ने जो नवीन तकनीकों और व्यावहारिक कौशल की जानकारी प्राप्त की है, वे उसे अपने-अपने विद्यालयों के विद्यार्थियों तक पहुंचाकर उन्हें बेहतर आजीविका और रोजगार के अवसरों के प्रति जागरूक करेंगे।
डॉ. शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों को केवल नौकरी की तलाश करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने भीतर छिपे कौशल को निखारकर स्वरोजगार, उद्यमिता और आय सृजन के नए रास्तों को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर इस तरह के प्रयास विद्यार्थियों को उनकी व्यक्तिगत रुचि और क्षमता के अनुसार कौशल विकसित करने, स्वरोजगार की संभावनाओं को गहराई से समझने तथा भविष्य के लिए मजबूत करियर विकल्प चुनने का सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं। एनएसक्यूएफ परियोजना के तहत उठाया गया यह कदम युवाओं को कुशल, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है।
