मंडी: कुछ अलग करने का जज्बा, कड़ी मेहनत और सही दिशा मिल जाए तो स्वरोजगार सफलता की एक मजबूत राह बन सकता है। इस बात को सच साबित कर दिखाया है सुंदरनगर के पुराना बाजार निवासी अंकित कुमार पुत्र श्री नानकचंद ने। बारहवीं तक की शिक्षा प्राप्त करने वाले अंकित ने नौकरी की तलाश करने के बजाय मशरूम उत्पादन को अपनी आजीविका का मुख्य जरिया बनाया और आज एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं।

अंकित ने वर्षों पहले महज 200 बैग बटन मशरूम से अपने व्यवसाय की छोटी सी शुरुआत की थी। इससे पहले उन्होंने एक मशरूम फार्म का दौरा किया और करीब छह-सात महीने वहाँ रहकर इस व्यवसाय की बारीकियों को बारीकी से समझा। इसके बाद उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, सुंदरनगर से विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया और वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया।
20 क्विंटल उत्पादन से प्रतिमाह डेढ़ लाख की शुद्ध आय
अनुभव, प्रशिक्षण और निरंतर मेहनत के बल पर अंकित का व्यवसाय लगातार फलता-फूलता गया। उन्होंने बटन मशरूम के साथ-साथ ढिंगरी मशरूम का उत्पादन भी शुरू किया और आज उनके फार्म की उत्पादन क्षमता बढ़कर करीब सात हजार बैग तक पहुँच चुकी है।
अंकित ने बताया कि उन्होंने लगभग 80×80 फीट के क्षेत्र में वर्टिकल फार्मिंग के माध्यम से मशरूम उत्पादन को व्यवस्थित किया है। सीमित भूमि का अधिकतम उपयोग करते हुए वे कई स्तरों पर उत्पादन कर रहे हैं। वर्तमान में वे प्रतिमाह करीब 20 क्विंटल मशरूम स्थानीय व आसपास की सब्जी मंडियों में भेज रहे हैं, जिससे सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें लगभग डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह की शुद्ध आय हो रही है।
खुम्ब विकास योजना से मिली वित्तीय सहायता
उद्यान विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ राजेश कुमार ने जानकारी दी कि सुंदरनगर उपमंडल में हिमाचल खुम्ब विकास योजना के तहत कुल 26 लाभार्थी हैं, जिन्हें विभागीय प्रावधानों के अनुसार वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करवाया जा रहा है।
इसी योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में अंकित कुमार को मशरूम शेड निर्माण के लिए 50 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई थी। विभागीय सहयोग और निरंतर मार्गदर्शन से अंकित ने अपने इस व्यवसाय को और अधिक विस्तृत रूप दिया। उद्यान अधिकारियों का कहना है कि कम भूमि वाले किसानों और युवाओं के लिए मशरूम उत्पादन स्वरोजगार का एक बेहतरीन और अत्यधिक लाभदायक माध्यम है।
पंजाब तक बढ़ाया कारोबार
अंकित की उद्यमशीलता अब केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने अपने व्यवसाय का दायरा बढ़ाते हुए पंजाब में भरतगढ़ के पास भी एक नई मशरूम इकाई स्थापित की है। वहाँ बांस से बनी हट्स में मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पंजाब के अधिक तापमान को ध्यान में रखते हुए वे वहाँ उपयुक्त किस्म का उपयोग करते हैं, जबकि सुंदरनगर में ठंडे मौसम के अनुकूल मशरूम की किस्म उगाई जाती है।
प्राकृतिक और जैविक उत्पादन
अंकित के फार्म की एक बड़ी विशेषता यह है कि वहाँ मशरूम का उत्पादन पूरी तरह प्राकृतिक और जैविक तरीके से किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह के हानिकारक रासायनिक पेस्टिसाइड, इंसेक्टिसाइड या फंगीसाइड का उपयोग नहीं किया जाता है। व्यवसाय के संचालन में वे आवश्यकतानुसार स्थानीय मजदूरों की मदद लेते हैं, जबकि उनकी पत्नी चरणजीत कौर भी इस कार्य में उनका पूरा सहयोग करती हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा
हिमाचल सरकार की खुम्ब विकास योजना का आभार व्यक्त करते हुए अंकित कुमार ने प्रदेश के युवाओं का आह्वान किया है कि वे केवल सरकारी नौकरियों के पीछे न भागें, बल्कि स्वरोजगार और कृषि-बागवानी आधारित व्यवसायों की संभावनाओं को अपनाएं। उनकी यह कहानी साबित करती है कि छोटी शुरुआत को भी लगन, मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ एक बड़े और सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है।