नाहन : हिमाचल प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन एक बड़े सियासी बदलाव का गवाह बना। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नए सूबा अध्यक्ष नितिन चौहान ने सिरमौर की धरती पर कदम रखते ही अपनी धमाकेदार मौजूदगी दर्ज कराई। हरियाणा बॉर्डर कालाअंब से लेकर नाहन शहर तक समर्थकों के विशाल काफिले, ढोल-नगाड़ों और गूंजते नारों ने यह साफ कर दिया कि लोजपा इस बार केवल उपस्थिति दर्ज कराने नहीं, बल्कि मुकाबला करने के मूड में है। शहर में प्रवेश करते ही नितिन चौहान ने सबसे पहले गुरुद्वारा साहिब दशमेश स्थान और फिर माँ कालीस्थान मंदिर में शीश नवाकर अपनी नई पारी की धार्मिक और आत्मिक शुरुआत की।
इस शक्ति प्रदर्शन का सीधा संदेश नाहन के उस पारंपरिक राजनीतिक ढर्रे के लिए है, जहाँ सालों से मुकाबला सिर्फ दो मुख्य दलों के बीच सिमटा हुआ था। पूर्व विधायक स्वर्गीय सदानंद चौहान के बेटे होने के नाते नितिन चौहान को नाहन की नब्ज और जनसंपर्क की बारीकियों का बखूबी अंदाजा है। साल 2017 के बाद भाजपा में सक्रिय रहने और अब दोबारा अपनी पुरानी पारिवारिक विरासत ‘लोजपा’ का झंडा थामने के इस कदम ने इलाके के सियासी समीकरणों को पूरी तरह उलझा दिया है। किसान भवन में हुई जनसभा और स्वागत रैली में जिस तरह से भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों से जुड़े चेहरे नजर आए, उसने दोनों ही पारंपरिक दलों के रणनीतिकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

हालाँकि, अपने पहले ही संबोधन में नितिन चौहान ने किसी भी पार्टी पर सीधा हमला करने की जगह बेहद संयमित और विकासपरक रुख अपनाया। मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता प्रदेश के युवाओं के हाथों को काम दिलाना और राज्य की सभी 68 विधानसभाओं में संगठन की जड़ें मजबूत करना है। बिना किसी पर कीचड़ उछाले रोजगार और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की यह रणनीति संकेत देती है कि आने वाले दिनों में नाहन ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल में लोजपा एक तीसरे मजबूत विकल्प के रूप में उभरने की पूरी तैयारी में है।