सोलन: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग सोलन द्वारा ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत आज जिला मुख्यालय में एक विशेष स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) सोलन डॉ. अजय पाठक ने की। शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज के सभी वर्गों, विशेषकर युवा पीढ़ी और विद्यार्थियों को नशे के बढ़ते दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करना तथा एक स्वस्थ व व्यसनमुक्त समाज का निर्माण करना रहा।

शिविर को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय पाठक ने कहा कि विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य पर अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि तंबाकू, शराब, गुटका, सिगरेट, चरस, गांजा, अफीम व अन्य सिंथेटिक मादक पदार्थों का सेवन करने से व्यक्ति न केवल आर्थिक रूप से बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से भी पूरी तरह कमजोर हो जाता है। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी खतरों से आगाह करते हुए बताया कि लंबे समय तक नशे के सेवन से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), कैंसर, फेफड़ों और किडनी की गंभीर बीमारियां होने की प्रबल संभावना बनी रहती है।
डॉ. पाठक ने नशे के मानसिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नशे से न केवल गंभीर शारीरिक नुकसान होते हैं, अपितु यह इंसान को अत्यधिक तनाव, चिंता (एंजायटी), अवसाद (डिप्रेशन), चिड़चिड़ापन और अनिद्रा जैसी खतरनाक मानसिक बीमारियों की गर्त में धकेल देता है। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि किसी भी प्रकार का नशा विद्यार्थियों के शैक्षणिक, व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं से हर प्रकार के नशे से दूरी बनाए रखने और जीवन में एक स्वस्थ, अनुशासित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का पुरजोर आग्रह किया।
इस विशेष अवसर पर सीएमओ ने समाज के दो मुख्य स्तंभों यानी अध्यापकों और अभिभावकों से भी एक भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक और माता-पिता बच्चों व विद्यार्थियों की दैनिक गतिविधियों पर पैनी नज़र रखें, उनके व्यवहार में आने वाले किसी भी छोटे-बड़े परिवर्तन को पूरी गंभीरता से लें और समय-समय पर उचित पारदर्शिता व मित्रता के साथ उनके साथ संवाद करते रहें। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपनों से लगातार स्वस्थ बातचीत और सही मार्गदर्शन के जरिए ही युवा पीढ़ी को भटकाव से बचाकर नशे की काली दुनिया से दूर रखा जा सकता है।