शिमला: हिमाचल प्रदेश के श्रमिक आंदोलन और ट्रेड यूनियन जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC – एटक) हिमाचल प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष और वरिष्ठ श्रमिक नेता कामरेड जगदीश चंद्र भारद्वाज का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से पूरे प्रदेश के मजदूर वर्ग, श्रमिक संगठनों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई है।

कामरेड जगदीश चंद्र भारद्वाज ने अपने करीब चार दशक (40 वर्ष) से अधिक के लंबे सार्वजनिक जीवन को पूरी तरह से श्रमिकों और शोषित वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया था। वे जीवन के अंतिम क्षणों तक मजदूर वर्ग की पीड़ा, उनकी जायज मांगों और संवैधानिक अधिकारों की आवाज को सड़क से लेकर देश की बड़ी अदालतों तक पूरी मजबूती और जोश के साथ उठाते रहे।
मजदूरों के मसीहा के रूप में मिली पहचान
श्रमिकों और कामगारों के हितों की लड़ाई में वे हमेशा अग्रिम पंक्ति पर रहकर नेतृत्व करते थे। यही वजह थी कि प्रदेश भर के कामगार उन्हें श्रमिकों का मसीहा मानते थे। वे सरकार के विभिन्न श्रम बोर्डों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे और समय-समय पर श्रम कानूनों में सुधार व उन्हें सख्ती से लागू करवाने के लिए संघर्षरत रहे।
उनके साथ विभिन्न संयुक्त धरना-प्रदर्शनों, हड़तालों और आंदोलनों में कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले सहयोगियों ने उन्हें एक अत्यंत निष्ठावान, संघर्षशील और कर्मठ जननेता बताया। मजदूरों के अधिकारों के प्रति उनका समर्पण और संगठन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी।
ट्रेड यूनियन और श्रमिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति
उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उनके सहयोगियों और शुभचिंतकों ने कहा कि कामरेड जगदीश चंद्र भारद्वाज का चले जाना केवल एटक संगठन के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश और देश के श्रमिक आंदोलन के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है। एटक के केंद्रीय व राज्य स्तरीय नेताओं, कार्यकर्ताओं, विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और मजदूर यूनियनों के प्रतिनिधियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।