शिमला : हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक में फर्जी अभ्यर्थियों (डमी कैंडिडेट्स) को बैठाकर बैंक अधिकारी बनने के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ हुआ है। सीबीआई की शिमला स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने इस पूरे फर्जीवाड़े के संदर्भ में 24 अगस्त 2026 को एफआईआर (RC0962026A0010) दर्ज कर ली है। मामले में बैंक में पदस्थ रहे राजस्थान निवासी दो अधिकारियों को नामजद किया गया है, जो डमी अभ्यर्थियों के जरिए धोखाधड़ी से परीक्षा पास करके नौकरी हासिल करने के दोषी पाए गए हैं।
सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार, इस फर्जीवाड़े की नींव परीक्षा केंद्रों से ही रखी गई थी। आरोपी रविंद्र मीणा (निवासी करौली, राजस्थान) और जितेंद्र कुमार मीणा (निवासी सवाई माधोपुर, राजस्थान) ने इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनेल सेलेक्शन (IBPS) द्वारा आयोजित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भर्ती परीक्षाओं में धोखाधड़ी की। आरोपियों ने सोलन स्थित L.R. इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और बिलासपुर स्थित शिवा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में बने परीक्षा केंद्रों में खुद बैठने के बजाय सॉल्वर (डमी अभ्यर्थियों) को परीक्षा देने भेजा था। इसी फर्जीवाड़े के दम पर जितेंद्र मीणा ने वर्ष 2022 की भर्ती परीक्षा (CRP RRB-XI) पास कर 1 जुलाई 2023 को पांगणा शाखा (मंडी) में और रविंद्र मीणा ने वर्ष 2023 की परीक्षा (CRP RRB-XII) के जरिए 12 फरवरी 2024 को बागस्याड शाखा (मंडी) में ऑफिस असिस्टेंट के रूप में नियुक्ति पाई थी।

इस फर्जीवाड़े की पोल तब खुली जब IBPS द्वारा कर्मचारियों का आंतरिक बायोमीट्रिक री-वेरिफिकेशन (पुनः सत्यापन) कराया गया। जांच के दौरान दोनों सेवारत कर्मचारियों के फिंगरप्रिंट, फोटो और हस्ताक्षर प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन के समय दर्ज किए गए डेटा से बिल्कुल मैच नहीं हुए। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 3 फरवरी 2026 को दोनों आरोपियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। सेवा काल के दौरान रविंद्र मीणा ने वेतन के रूप में ₹11,10,826 और जितेंद्र मीणा ने ₹14,46,146 की राशि हासिल की थी, इसके अलावा दोनों के नाम पर बैंक लोन की लाखों रुपये की देनदारी भी बकाया है।
सीबीआई ने दोनों आरोपियों के अलावा अज्ञात लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र), 419 (छद्मवेश धारण कर धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 व 7A के तहत मामला दर्ज किया है। सीबीआई के निरीक्षक कुलदीप चंद को इस मामले की विस्तृत जांच सौंपी गई है। जांच एजेंसी को आशंका है कि यह सिर्फ दो कर्मचारियों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजस्थान और हिमाचल के बीच काम कर रहा एक बड़ा संगठित ‘सॉल्वर गैंग’ शामिल है, जिसकी कड़ियों को जोड़ने के लिए राजस्थान में भी दबिश दी जा रही है।