शिमला : हिमाचल प्रदेश दिव्यांग कल्याण संघ ने राज्य मंत्रिमंडल की 10 अक्टूबर की बैठक में लिए गए निर्णयों पर अपना कड़ा रुख अपनाया है। संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र नेगी ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मुख्यमंत्री द्वारा दिव्यांग पेंशन को बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह करने के निर्णय का स्वागत किया और इसे एक राहत देने वाला कदम बताया। हालांकि, उन्होंने हाल ही में विभिन्न सरकारी विभागों में स्वीकृत 11,035 पदों की भर्ती प्रक्रिया में दिव्यांगों के साथ हुए अन्याय पर गहरा रोष भी व्यक्त किया है।
संघ का आरोप है कि राज्य सरकार की नई भर्तियों में दिव्यांगों के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की गई है। ‘RPWD Act 2016’ की धारा 34 के अनुसार, सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य है। इसके तहत स्वीकृत 11,035 पदों में से कम से कम 560 पद दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित होने चाहिए थे। इसके विपरीत, सरकार द्वारा मात्र 38 पद (27 बैकलॉग और 11 मल्टी टास्क) ही आरक्षित किए गए हैं, जिससे स्पष्ट रूप से 522 पद गायब हैं और यह योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन है।

विभागीय आंकड़ों पर प्रकाश डालते हुए नेगी ने बताया कि कई प्रमुख विभागों में दिव्यांगों का कोटा पूरी तरह शून्य रखा गया है। जल शक्ति विभाग के 4,090 पदों, CBSE स्कूलों में भर्ती के 4,800 पदों, नर्सों के 500 पदों, वन रक्षकों के 500 पदों और 160 तकनीकी पदों में से एक भी पद दिव्यांगों के लिए आरक्षित नहीं किया गया है। संघ का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर भर्ती होने के बावजूद विभिन्न विभागों में एक भी पद न देना अत्यंत निराशाजनक है।
अपनी मांगों को रेखांकित करते हुए संघ ने प्रदेश सरकार से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की अपील की है। संघ की मांग है कि गायब किए गए शेष 522 पदों को तुरंत दिव्यांगों के 4 प्रतिशत कोटा के तहत भरा जाए और सभी सरकारी विभागों में RPWD कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर सरकार इस दिशा में कोई उचित निर्णय नहीं लेती है, तो संघ अपने अधिकारों और समानता के न्याय के लिए माननीय उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करने के लिए बाध्य होगा।