शिमला: एपीजी विश्वविद्यालय परिसर में हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में ‘बियोंड ड्रीम्स: बिल्डिंग सेफर एंड स्ट्रॉन्गर यूथ’ विशेष जागरूकता कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) आईपीएस अशोक तिवारी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। मंच से युवाओं को चिट्टे के दुष्परिणामों और साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक किया गया।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डीजीपी अशोक तिवारी ने कहा कि पुलिस आपकी सच्ची दोस्त है और समाज में पुलिस के प्रति पारंपरिक सोच को बदलने की आवश्यकता है। केवल यूनिफॉर्म पहन लेने से कोई पुलिस नहीं बनता, इसके लिए जनसेवा का सच्चा जज्बा चाहिए।
उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों में ऐसी यूनिट्स स्थापित करने की अपील की और पुलिस विभाग की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। विद्यार्थियों को पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से समझने के लिए पुलिस स्टेशन और विभिन्न यूनिट्स का दौरा करने का निमंत्रण दिया।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. डॉ. आर.एल. शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में पुलिस के अभियान की सराहना करते हुए कहा कि एपीजी विश्वविद्यालय नशीले पदार्थों के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहा है। सामूहिक प्रयासों से ही युवाओं को मुख्यधारा में बनाए रखा जा सकता है। कार्यक्रम में पुलिस विभाग की इंस्पेक्टर रीना, कांस्टेबल आनंदिनी और कांस्टेबल निकिता ने विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण कानूनी व सुरक्षा संबंधी जानकारी दी। निकिता ने किसी भी साइबर अपराध या वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करने की सलाह दी गई।
जागरूकता अभियान के तहत विद्यार्थियों ने पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक और कविता पाठ के माध्यम से नशे के खिलाफ संदेश दिया। पोस्टर मेकिंग के विजेताओं को डीजीपी द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर एपीजी यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर प्रो. डॉ. रमेश चौहान, डीन एकेडमिक्स प्रो. डॉ. आनंद मोहन शर्मा, डीन फैकल्टी प्रो. डॉ. अश्वनी शर्मा, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. डॉ. नीलम शर्मा, डीन मैनेजमेंट डॉ. नीति नाग, डॉ. ज्योत्सना शर्मा सहित कई गणमान्य लोग व छात्र उपस्थित रहे।