ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भारत का बड़ा कदम, कोयला गैसीकरण के लिए ₹37,500 करोड़

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By Hills Post

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के विजन को गति देने के लिए एक युगांतकारी निर्णय लिया है। सरकार ने 37,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के लिए एक नई प्रोत्साहन योजना को मंजूरी प्रदान की है।

इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करना है। इससे न केवल घरेलू कोयला संसाधनों का विविध उपयोग सुनिश्चित होगा, बल्कि एलएनजी, यूरिया और मेथनॉल जैसे प्रमुख उत्पादों के भारी आयात बिल में भी बड़ी कटौती होगी।

भारत वर्तमान में अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत से अधिक एलएनजी, 20 प्रतिशत यूरिया और लगभग 90 प्रतिशत मेथनॉल आयात करता है। इस योजना के माध्यम से कोयले को सिंथेटिक गैस (Syngas) में बदला जाएगा, जो इन रसायनों और ईंधनों के उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में काम आएगी। इससे वैश्विक मूल्य अस्थिरता और भू-राजनीतिक बाधाओं के बीच भारत की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित होगी।

सरकार ने इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए कई उदार वित्तीय प्रावधान किए हैं। संयंत्र और मशीनरी की लागत के 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। किसी एक परियोजना के लिए प्रोत्साहन की सीमा ₹5,000 करोड़ तय की गई है, जबकि एक इकाई समूह के लिए यह अधिकतम ₹12,000 करोड़ होगी। परियोजनाओं का चयन प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

कोयला लिंकेज की अवधि को बढ़ाकर 30 वर्ष कर दिया गया है, जिससे निवेशकों को दीर्घकालिक सुरक्षा मिलेगी। इस योजना से देश में 2.5 से 3.0 लाख करोड़ रुपये के निवेश आने का अनुमान है। कोयला क्षेत्रों में स्थित लगभग 25 परियोजनाओं के माध्यम से 50 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होने की उम्मीद है। 75 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण से सरकारों को सालाना लगभग ₹6,300 करोड़ का लाभ होने का अनुमान है, जिसमें जीएसटी और अन्य कर भी शामिल हैं।

भारत के पास विश्व का विशालतम कोयला भंडार (लगभग 401 अरब टन) है। वर्तमान में देश के ऊर्जा मिश्रण में कोयले की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से अधिक है। वित्त वर्ष 2025 में एलएनजी, यूरिया और अन्य रसायनों का आयात बिल लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा है। पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक अस्थिरता ने भारत के लिए अपने घरेलू संसाधनों का उपयोग अनिवार्य बना दिया है।

यह नई योजना जनवरी 2024 में स्वीकृत ₹8,500 करोड़ की पिछली योजना का ही एक उन्नत और विस्तारवादी रूप है, जो राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन (2021) को नई गति प्रदान करेगी। इसके माध्यम से भारत उच्च मूल्य वाले आयातों का वैकल्पिक केंद्र बनने और वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों से खुद को सुरक्षित रखने की दिशा में अग्रसर होगा।

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