सोलन: गुरुकुल इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सोलन में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यक्रम के अंतर्गत कहानी-कथन को शिक्षण-पद्धति के रूप में अपनाना विषय पर एक अत्यंत ज्ञानवर्धक और विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को नवीन एवं प्रभावी शिक्षण-पद्धतियों से परिचित करवाना तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक रोचक, रचनात्मक और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता पर आधारित बनाना था।

संसाधन व्यक्तियों के बहुमूल्य विचार
कार्यशाला में श्रीमती रंजना भारद्वाज एवं श्रीमती आरती वर्मा ने संसाधन व्यक्तियों के रूप में सहभागिता की। उन्होंने शिक्षकों को कहानी-कथन की विभिन्न तकनीकों और प्रभावी तरीकों से अवगत कराया। उन्होंने विस्तार से बताया कि कहानी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि इसे एक सशक्त शिक्षण-पद्धति के रूप में अपनाकर विद्यार्थियों में कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता, भाषा-कौशल, अभिव्यक्ति-कौशल, चिंतन-क्षमता और विषय की गहरी समझ को आसानी से विकसित किया जा सकता है।
संसाधन व्यक्तियों ने स्वर में उतार-चढ़ाव, भाव-भंगिमा, संवाद-अभिनय, पात्रों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण और कक्षा में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। विभिन्न गतिविधियों और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से शिक्षकों को यह भी समझाया गया कि अलग-अलग विषयों के शिक्षण में कहानी-कथन का रचनात्मक उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है।
शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी
इस कार्यशाला में गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल के शिक्षकों के साथ-साथ अन्य विभिन्न विद्यालयों से आए अनेक शिक्षकों ने भी बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अपने अनुभव साझा किए तथा कहानी-कथन को कक्षा-कक्ष की नियमित शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने के व्यावहारिक तरीकों को बारीकी से समझा।
प्रधानाचार्या का संदेश
कार्यशाला के समापन अवसर पर विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती सागरिका बख्शी ने संसाधन व्यक्तियों श्रीमती रंजना भारद्वाज एवं श्रीमती आरती वर्मा का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएँ शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और उन्हें नवीन शिक्षण-पद्धतियों को कक्षा में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी शिक्षकों का भी धन्यवाद किया।
यह कार्यशाला अत्यंत संवादात्मक, प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक रही, जिसने शिक्षकों को शिक्षण को अधिक जीवंत, सहज और प्रभावशाली बनाने के लिए नए विचार और दृष्टिकोण प्रदान किए।