गुवाहाटी में Grit & Glory का विमोचन, संघ के शहीदों को श्रद्धांजलि

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By Hills Post

गुवाहाटी: मशहूर लेखक अभिजीत जोग की लिखी पुस्तक Grit & Glory: How India’s Northeast was Transformed One Heart at a Time का 26 सितंबर 2026 को गुवाहाटी के NEDFi कन्वेंशन सेंटर में विमोचन किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक हरिभाऊ मिरासदार और उल्हास कुलकर्णी की मौजूदगी में IAS (सेवानिवृत्त) राजीव कुमार बोरा ने पुस्तक का विमोचन किया। पत्रकार नव ठाकुरीया की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में RSS कार्यकर्ता और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए।

नई दिल्ली के सुरुचि प्रकाशन से प्रकाशित इस 300 पन्नों की पुस्तक की कीमत 445 रुपये है। पुस्तक की प्रस्तावना केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने लिखी है। RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि यह किताब उस समर्पण और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक तस्वीर पेश करती है, जिसके साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राष्ट्र सेविका समिति के कई युवा कार्यकर्ताओं ने भारत के उत्तर-पूर्व में बदलाव लाया। यह किताब भारत के युवाओं में भी वैसा ही दृढ़ संकल्प और समर्पण पैदा करेगी, ताकि हमारी पवित्र मातृभूमि सर्वोच्च गौरव प्राप्त कर सके और पूरी मानवता का भला हो सके।

यह पुस्तक उन लोगों की कहानियां प्रस्तुत करती है, जिन्होंने उत्तर-पूर्व भारत में सामाजिक बदलाव के लिए संघ के साथ काम किया और जिनमें से कई लोगों को अपनी कीमती जान गंवानी पड़ी। पुस्तक में नेपाल, भूटान, तिब्बत (अब चीन के अधीन), म्यांमार और बांग्लादेश से घिरे इस क्षेत्र के इतिहास, चुनौतियों और सामाजिक बदलाव पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें RSS से जुड़े संगठनों के प्रचारकों और अन्य स्वयंसेवकों पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया है। पुस्तक में देशभर के सैकड़ों RSS स्वयंसेवकों के अनुभव भी शामिल किए गए हैं, जिन्हें पुस्तक भारत के लोगों के लिए उम्मीद और आकांक्षाओं से जोड़ती है।

पुस्तक का विमोचन करते हुए राजीव कुमार बोरा ने उत्तर-पूर्व में शुरुआती वर्षों के दौरान RSS कार्यकर्ताओं के सामने आई चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि काम करते हुए कई RSS प्रचारकों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी। हरिभाऊ मिरासदार ने बताया कि RSS ने 1946 में गुवाहाटी से इस क्षेत्र में अपना काम शुरू किया था और कई वर्षों तक इसका विस्तार धीमा रहा। हालांकि, संघ के कार्यकर्ताओं ने सभी चुनौतियों का सामना किया और जल्द ही RSS को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

उल्हास कुलकर्णी ने अपने भाषण में बताया कि किस तरह पूर्वोत्तर समाज के एक वर्ग द्वारा संघ के स्वयंसेवकों से नफरत की जाती थी। उन्होंने कहा कि RSS ने बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के खिलाफ चलाए गए असम आंदोलन का समर्थन किया था।
नव ठाकुरीया ने अपनी समापन टिप्पणी में मीडिया संस्थानों द्वारा RSS और उसकी गतिविधियों की विश्वसनीय रिपोर्टिंग पर जोर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत गणमान्य अतिथियों द्वारा भारत माता की तस्वीर के सामने पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। कार्यक्रम का संचालन नबमिता देब ने किया। इस दौरान रीता भुइयां ने बोरगीत प्रस्तुत किया, जबकि हीराक शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। कार्यक्रम का समापन भारत के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण के गायन के साथ हुआ।

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