नाहन : रियासती दौर की ऐतिहासिक पहचान, ठंडी हवाओं, अपनी सफाई और बेमिसाल खूबसूरती के लिए कभी ‘नगीना’ कहा जाने वाला नाहन शहर इन दिनों एक अजीब से विरोधाभास से जूझ रहा है। शहर के ऐतिहासिक बाजार हों, गुन्नूघाट या चौगान के आसपास के इलाके हों, चौक-चौराहे हों या वार्डों की तंग गालियां—हर तरफ कचरे के ढेर और प्लास्टिक के लिफाफे बिखरे नजर आ रहे हैं। यह स्थिति किसी एक वार्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर के प्रमुख मार्गों की यही कहानी बनी हुई है। शहर की इस बदहाली को देखकर अब स्थानीय निवासियों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस गंदगी का असल जिम्मेदार कौन है।
यदि इस समस्या का ठीकरा सीधे नगर परिषद पर फोड़ने की सोचें, तो धरातल की सच्चाई कुछ और ही तस्वीर बयां करती है। नगर परिषद के सफाई कर्मचारी सुबह और शाम दोनों समय ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाते दिखते हैं। इतना ही नहीं, डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन योजना के तहत नगर परिषद की गाड़ियां और कर्मचारी हर रोज घर-घर जाकर गीला और सूखा कचरा इकट्ठा भी करते हैं। जब सफाई व्यवस्था का आधा ढांचा पूरी तरह सक्रिय है, तो फिर हर सुबह सड़कों, नालियों और खाली प्लॉटों में कचरे के नए ढेर कहां से आ जाते हैं?

गहराई से पड़ताल करने पर पता चलता है कि नाहन की खूबसूरती को ग्रहण लगाने वाले कोई बाहरी लोग नहीं, बल्कि शहर के ही कुछ बेपरवाह नागरिक हैं। अक्सर देखा गया है कि जब सुबह डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाली गाड़ी अपने तय समय पर निकल जाती है, तो उसके बाद कई लोग अपने घरों का कचरा बाहर लाकर सड़कों या नालियों के किनारे फेंक देते हैं। इसके अलावा, देर रात या तड़के अंधेरे का फायदा उठाकर कुछ लोग पॉलीथिन बैग में बंद कचरा सार्वजनिक स्थानों पर फेंकने से नहीं हिचकिचाते। दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाला कचरा भी कई बार सही डस्टबिन में डालने के बजाय बाहर छोड़ दिया जाता है, जिसे बाद में आवारा पशु पूरे इलाके में फैला देते हैं।
नगर परिषद के सफाई कर्मचारी दिन-रात मेहनत करके शहर को साफ रखने का प्रयास करते हैं, लेकिन जब तक नागरिक खुद अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक कोई भी प्रशासनिक व्यवस्था शहर को स्वच्छ नहीं रख सकती। सफाई कर्मचारी कचरा उठा सकते हैं, लेकिन कचरे को सही जगह निपटाने का नागरिक कर्तव्य तो जनता को ही निभाना होगा। यदि नाहन को फिर से असल मायनों में ‘नगीना’ बनाना है, तो खुले में कचरा फेंकने वालों पर भारी जुर्माना लगाने, संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी करने और नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जवाबदेही तय करने की सख्त जरूरत है।
जब तक हम अपनी इस आदत को नहीं बदलेंगे, तब तक नाहन की खूबसूरती को लगा यह ग्रहण हटने वाला नहीं है।