नाहन में किलो! पर अम्बाला-चंडीगढ़ में दर्जन, जानिए केले के अनोखे खेल का दिलचस्प राज

नाहन : अगर आप नाहन के पड़ोसी शहरों अम्बाला, यमुनानगर या फिर ट्राईसिटी चंडीगढ़ की तरफ जाएं—यहाँ तक कि हिमाचल के ही सोलन, शिमला और हरिपुरधार जैसे इलाकों का रुख करें—तो वहाँ आज भी अमूमन लोग फ्रूट वेंडर से यही कहते हैं कि “भैया, एक दर्जन केले दे दो”। लेकिन जैसे ही आप ऐतिहासिक नगरी नाहन पहुंचते हैं, तो यहाँ दर्जन का यह पारंपरिक सिस्टम गायब हो जाता है। नाहन के बाजारों में केला गिनती से नहीं, बल्कि पूरी तरह से तराजू पर तोलकर ‘किलो’ के भाव बेचा जाता है।

चंद किलोमीटर की दूरी पर ये सिस्टम इतना अलग क्यों है? इस दिलचस्प सवाल का जवाब जानने के लिए ‘हिल्स पोस्ट’ ने जब ग्राउंड जीरो पर जाकर नाहन के बड़ा चौक के पुराने और अनुभवी सब्जी व फल व्यापारी बृजमोहन सिंगला से बात की, तो उन्होंने इसके पीछे की असली इनसाइड स्टोरी (Inside Story) बताई।

पहले चलता था ‘सैंकड़े’ का हिसाब, अब मंडी से ही बदला खेल
बड़ा चौक के व्यापारी बृजभूषण अग्रवाल ने बताया कि पहले नाहन और आस-पास के इलाकों में भी केले की बिक्री गिनती के हिसाब से ही होती थी। उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि जब सब्जी मंडी पक्के तालाब के पास होती थी तब ‘क्रैट’ (Crate) या थोक मंडी का सिस्टम था, तब केला सैकड़े (100 या 120 के भाव) के हिसाब से बिकता था। उस समय एक तय रेट होता था कि आपने इस भाव में सैकड़ा लिया है और उसी हिसाब से आगे बेचा जाता था।

थोक मंडी से ही आता है 50-50 किलो का माल
बृजमोहन सिंगला के मुताबिक, यह बदलाव रिटेल दुकानदारों ने नहीं, बल्कि सीधे थोक मंडी (Wholesale Mandis) से शुरू हुआ है। अब मंडी में केले की पेटियां या क्रेट गिनती के बजाय वजन के हिसाब से आती हैं। मंडी से सीधे किलो के हिसाब से माल भेजा जाता है। जब पीछे (मंडी) से ही माल तोल कर आ रहा है, तो नाहन के स्थानीय व्यापारियों के लिए भी आगे दर्जन के बजाय किलो के हिसाब से बेचना ही सबसे सही और व्यावहारिक रास्ता रह जाता है।

दर्जन VS किलो: आखिर क्यों बना हुआ है सस्पेंस?
सिंगला कहते हैं कि बाकी सब जगह (जैसे अम्बाला, चंडीगढ़) आज भी दर्जन का हिसाब चलता है, लेकिन नाहन की मंडियों और बाजारों का मिजाज अब पूरी तरह तोल पर आधारित हो चुका है। हालांकि ग्राहकों के नजरिए से देखा जाए, तो किलो के सिस्टम में एक पारदर्शिता रहती है—अगर केले का साइज छोटा है तो 1 किलो में ज्यादा केले (8 से 10) चढ़ जाते हैं, और साइज बड़ा है तो 5-6 केले आते हैं। यानी ग्राहक को पैसे के बदले पूरा वजन मिलता है।

तो अगली बार जब आपके अम्बाला या चंडीगढ़ वाले रिश्तेदार नाहन आएं और बड़ा चौक पर केला देखकर दर्जन का भाव पूछें, तो उन्हें बड़ा चौक के व्यापारियों का यह ‘मंडी गणित’ जरूर समझाइएगा!

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पंकज जयसवाल

पंकज जयसवाल, हिल्स पोस्ट मीडिया में न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 2 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह समाज सेवी संगठनों से जुड़े रहे हैं और हजारों युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा देने के साथ साथ रोजगार दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।