नाहन : रून नदी के खौफनाक उफान में बुजुर्ग बनारसी दास की जान बचाने के लिए सैलाब में कूदे बर्मा पापड़ी के दूसरे जांबाज युवक नरेश कुमार पुत्र राज कुमार चंडीगढ़ से सकुशल इलाज कराकर अपने घर लौट आए हैं। बहादुरी के इस प्रयास में गंभीर रूप से घायल हुए नरेश कुमार का हाल-चाल जानने और उनके अदम्य साहस को सलाम करने आज लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष नितिन चौहान विशेष रूप से उनके निवास स्थान पहुंचे।
नितिन चौहान ने जांबाज नरेश कुमार को हिमाचली टोपी और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने नरेश के जज्बे की तारीफ करते हुए कहा कि जब रून नदी रौद्र रूप में थी, तब अपनी जान की परवाह किए बिना उफनते पानी में छलांग लगाना निस्वार्थ इंसानियत और वीरता की सबसे अनूठी मिसाल है।

उल्लेखनीय है कि रून नदी के तेज बहाव में बुजुर्ग को सुरक्षित टापू तक पहुंचाने की कोशिश में जल शक्ति विभाग के कर्मचारी अंशुल के साथ नरेश कुमार भी नदी में उतर गए थे। हालांकि, पानी के भीषण प्रहार और पत्थरों की चपेट में आने से नरेश गंभीर रूप से चोटिल हो गए थे, जिसके बाद उन्हें तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया था। बीते रविवार को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे बर्मा पापड़ी स्थित अपने घर पहुंचे हैं।
इससे पहले नितिन चौहान ने इस रेस्क्यू के दूसरे नायक अंशुल से भी मुलाकात कर उनका अभिनंदन किया था। नरेश कुमार से मुलाकात के बाद नितिन चौहान ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से मांग की है कि अपनी जान दांव पर लगाकर बुजुर्ग की रक्षा करने वाले इन दोनों युवाओं (अंशुल और नरेश) को राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार से अलंकृत किया जाना चाहिए।
मुलाकात के दौरान लोजपा प्रदेश अध्यक्ष ने स्थानीय ग्रामीणों से भी संवाद किया और क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं व बुनियादी जरूरतों पर चर्चा की। रून नदी के इस साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद से ही पूरे सिरमौर जिले में नरेश कुमार और अंशुल के साहस की चौतरफा सराहना हो रही है।