सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में प्रशासनिक गतिरोध के बीच कुलपति ने बड़ा कदम उठाया है। एक आदेश में अनुशासनहीनता, आदेशों की अवहेलना, कर्तव्य में लापरवाही और विश्वविद्यालय परिसर में अराजकता का माहौल निर्मित करने के संगीन आरोपों के तहत रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य की सभी वैधानिक व प्रशासनिक शक्तियों को तत्काल प्रभाव से छीन लिया गया है।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, उनके स्थान पर विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. डी.पी. शर्मा को बिना किसी अतिरिक्त मानदेय के अगले आदेश तक कुलसचिव पद का पूर्ण अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। कुलपति द्वारा जारी कार्यालय आदेश में कुलसचिव सिद्धार्थ आचार्य के खिलाफ कई गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है।

इन आरोपों में महाधिवक्ता की राय की अनदेखी, प्रबंध मंडल के निर्णयों पर अवैध रोक, असंतोषजनक स्पष्टीकरण तथा छात्र हड़ताल, कुलपति को कथित बंधक बनाने का घटनाक्रम, छात्र प्रदर्शन और हिंसा तथा आज के घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है। आदेश में विश्वविद्यालय परिसर में हाल ही में घटीं दो हिंसक घटनाओं के लिए कुलसचिव को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है। आधिकारिक आदेश के अनुसार कुलसचिव ने स्थिति संभालने के लिए वार्ता करने के कुलपति के निर्देशों को साफ ठुकरा दिया।
यह भी पढ़े : नौणी विश्वविद्यालय में विवाद, कुलपति कार्यालय के बाहर कर्मचारियों का विरोध
विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार जब कुलपति ने टेलीफोन पर रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य को तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करने का आदेश दिया, तो उन्होंने आदेश मानने से मना कर दिया और कुलपति से अभद्रता की। आदेश में कहा गया है कि इससे कुलसचिव और उपद्रवी संकाय सदस्यों के बीच मिलीभगत की मजबूत और तर्कसंगत आशंका पैदा होती है।
विश्वविद्यालय परिसर में 11 अक्टूबर 2026 को हिमाचल प्रदेश के कुलाधिपति (राज्यपाल) और 22 नवंबर 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) का दौरा प्रस्तावित है। आदेश में अंदेशा व्यक्त किया गया है कि रजिस्ट्रार जानबूझकर परिसर में अराजकता फैलाकर इन अति-विशिष्ट दौरों को नाकाम करने और इस प्रतिष्ठित संस्थान की साख को गंभीर नुकसान पहुंचाने का प्रयास करने हवाला देते हुए यह आधिकारिक आदेश जारी किया है।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी इस आधिकारिक आदेश के अनुसार अनुशासन बनाए रखने और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ रोकने के लिए कुलपति ने यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार सिद्धार्थ आचार्य की सभी प्रशासनिक व वैधानिक शक्तियां, कर्तव्य और कार्य तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाते हैं। उनके स्थान पर अब डॉ. डी.पी. शर्मा (निदेशक, विस्तार शिक्षा) तुरंत प्रभाव से कुलसचिव का पदभार संभालेंगे।
आधिकारिक आदेश के अनुसार सिद्धार्थ आचार्य को निर्देश दिया गया है कि वे सभी सरकारी फाइलें और कुलसचिव कार्यालय की चाबियां तुरंत डॉ. डी.पी. शर्मा को सौंप दें।