सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में आज भारी विवाद हो गया है। सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई जब शिक्षकों को जारी किए गए नोटिसों के विरोध में शिक्षक कुलपति से ना मिलने देने को लेकर विरोध करने लग गए। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे घटना के वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि कार्यालय के बाहर भारी हंगामा हो रहा है और सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोके जाने के बाद शिक्षकों व प्रशासन के बीच तीखी बहस हो रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ पिछले दिनों सोलन में आयोजित राज्यपाल के एक कार्यक्रम से जुड़ी है। विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षक अपने अवकाश के दिन वहां राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट करने गए थे। इस बात पर संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन शिक्षकों को नोटिस जारी कर दिए गए। शिक्षकों का स्पष्ट रूप से कहना है कि छुट्टी के दिन वे अपने व्यक्तिगत समय में कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं और वे वहां किसी आधिकारिक विश्वविद्यालयी कार्यक्रम के तहत शामिल होने नहीं गए थे। ऐसे में प्रशासन द्वारा उन्हें नोटिस जारी करने का कोई भी तार्किक कारण उनकी समझ से परे है।
इसी प्रशासनिक कार्रवाई का कारण पूछने और अपना पक्ष रखने के लिए शिक्षक सोमवार को कुलपति से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे थे। शिक्षकों का आरोप है कि वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी और रास्ता रोक लिया, जिससे विवाद गहरा गया। मामला बढ़ता और उग्र होता देख कुलपति ने खुद को कमरे के अंदर बंद कर लिया, जिसके रोष स्वरूप शिक्षक कार्यालय के बाहर विरोध करने लगे।
इस पूरे प्रकरण पर नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.एस. बवेजा ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया है। डॉ. बवेजा ने कहा कि उनके कार्यालय के बाहर कुछ लोग हंगामा कर रहे थे। स्थिति को देखते हुए उन्होंने तुरंत सुरक्षाकर्मियों को मौके पर बुलाया और सुरक्षाकर्मियों के ही सुझाव पर एहतियातन अपने कार्यालय का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। कुलपति ने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक व्यवस्था में कुलपति से मिलने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है, जिसका पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने परिसर में हुए इस हंगामे की विस्तृत सूचना प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस प्रशासन को दे दी है।
गौरतलब है कि नौणी विश्वविद्यालय के प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठने वाले ये सवाल नए नहीं हैं। इससे पहले विश्वविद्यालय के छात्र भी प्रशासन के मनमाने फैसलों के खिलाफ लगातार मोर्चा खोलते रहे हैं। हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक अधिसूचना जारी कर छात्रों का हॉस्टल शुल्क 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति बेड प्रतिदिन कर दिया था, जिसे छात्रों के भारी विरोध के बाद प्रशासन को वापस लेना पड़ा था। इसके अलावा, पिछले दिनों की गई भारी फीस वृद्धि को भी छात्रों के प्रदर्शनों के बाद मजबूरन कुछ कम किया गया था।