जेनेवा: आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में भारतीय पत्रकार वी. जगनमोहन रेड्डी की हत्या के मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। मीडिया सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े वैश्विक संगठन प्रेस एम्ब्लेम कैंपेन (PEC) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के मुताबिक, 28 अप्रैल 2026 को तेलुगु पत्रकार जगनमोहन रेड्डी की उस समय हत्या कर दी गई, जब वह सुबह टहलने निकले थे। चित्तूर जिले के वेंकटागिरी कोटैन इलाके में कुछ हमलावरों ने धारदार हथियारों से उन पर हमला किया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। बाद में पोस्टमॉर्टम के लिए उनके शव को पालमनेरु सरकारी अस्पताल भेजा गया। वह ‘ABN आंध्र ज्योति’ से जुड़े थे।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जगनमोहन ने हाल ही में क्षेत्र में सक्रिय चंदन तस्करों पर रिपोर्टिंग की थी, जिसके कुछ ही दिनों बाद उन पर हमला हुआ। इसको लेकर पत्रकार संगठनों ने साजिश की आशंका जताई है। तिरुपति प्रेस क्लब में विभिन्न पत्रकार संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (IJU) ने इस हमले की निंदा करते हुए पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून और स्पष्ट नीति बनाने की मांग उठाई।
पीईसी के अध्यक्ष ब्लेज लेम्पेन ने कहा कि यह हत्या बेहद चिंताजनक है और राज्य सरकार को मामले की गहराई से जांच कर वास्तविक कारणों का पता लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कानून के तहत सजा दी जानी चाहिए। पीईसी के अनुसार, जगनमोहन रेड्डी इस साल भारत में पत्रकारिता से जुड़े पहले शिकार हैं, जबकि दुनियाभर में यह 26वीं घटना है।
पीईसी के दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रतिनिधि नव ठाकुरीया ने बताया कि चित्तूर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू का गृह जिला है। जगनमोहन रेड्डी अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2025 में भारत में छह पत्रकारों की हत्या हुई थी, जिनमें मुकेश चंद्राकर, राघवेंद्र वाजपेयी, सहदेव डे, धर्मेंद्र सिंह चौहान, नरेश कुमार और राजीव प्रताप सिंह शामिल थे। इस घटना ने एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।