शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ ने कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। महासंघ के शीर्ष नेतृत्व ने एक संयुक्त बयान जारी कर कड़े शब्दों में कहा कि पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली के नाम पर कर्मचारियों और पेंशनरों की अन्य वैधानिक व वित्तीय देनदारियों को रोकना किसी भी सूरत में तर्कसंगत और उचित नहीं है।

महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष नरेश ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष देव राज शर्मा, महामंत्री उमेष कुमार, सुशील शर्मा, जगदीश राणा, चमन लाल कलवान, गौतम दुलाटा तथा राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विपिन डोगरा ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में सरकार को घेरा।
नेताओं ने कहा कि ओपीएस कर्मचारियों का संवैधानिक और वैधानिक अधिकार है, सरकार द्वारा किया गया कोई विशेष अनुग्रह या अहसान नहीं। ओपीएस बहाली की आड़ में कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA), पे एरियर, पदोन्नति लाभ, वेतन विसंगति, एसीपी और विभिन्न लंबित भत्तों को रोकना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
कर्मचारी नेताओं ने विशेष रूप से पेंशनर वर्ग की अनदेखी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 65 वर्ष से कम आयु के पेंशनरों को देय रिवाइज्ड ग्रेच्युटी, पे एरियर और अन्य सेवानिवृत्ति के वित्तीय लाभों की बकाया राशि का भुगतान साल 2022 से लगातार लंबित पड़ा है। इतने लंबे समय से अपनी ही गाढ़ी कमाई के लिए तरस रहे बुजुर्ग पेंशनर अब खुद को पूरी तरह उपेक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
महासंघ के पदाधिकारियों ने सरकार को याद दिलाया कि प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों ने अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और ऊर्जावान समय राज्य की जनता की सेवा और विकास कार्यों में समर्पित किया है। ऐसे में बुढ़ापे या सेवाकाल के अंतिम पड़ाव पर उनके वैध वित्तीय अधिकारों की अनदेखी करना बेहद चिंता का विषय है। सरकार की वर्तमान नीतियों के कारण प्रदेश का हर कर्मचारी वर्ग आज मानसिक रूप से प्रभावित हो रहा है।
कर्मचारी महासंघ ने हिमाचल प्रदेश सरकार से पुरजोर मांग की है कि कर्मचारियों और पेंशनरों के सभी लंबित वित्तीय देयों, डीए की किस्तों और पे एरियर के भुगतान के लिए तुरंत बजटीय व्यवस्था की जाए। सरकार केवल कोरे आश्वासन देने के बजाय इन सभी लंबित देनदारियों और एरियर के क्रमिक भुगतान के लिए एक स्पष्ट और निश्चित समयसीमा की घोषणा करे।