पूर्वी असम में आई भीषण बाढ़, नागा पहाड़ियों में पर्यावरणीय नुकसान

गुवाहाटी: पूर्वी असम के शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट और जोरहाट जिलों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन 2 अगस्त 2026 तक आई इस विनाशकारी लहर में बच्चों समेत 82 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग अब भी लापता हैं। ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों दिखो, दिसांग, दारिका, जांजी आदि में आए भारी उफान से हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई, लाखों मवेशी व मुर्गियां बह गए और सैकड़ों परिवार राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

हालाँकि, 18 से 22 जुलाई 2026 के बीच हुई 137 मिमी की मूसलाधार बारिश इस आपदा का तात्कालिक कारण थी, लेकिन विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के अनुसार पहाड़ी इलाकों में इंसानी गतिविधियों व पर्यावरण के विनाश ने इस त्रासदी को और अधिक विकराल बना दिया।

अपर्याप्त चेतावनी प्रणाली और जिला प्रशासन की लापरवाही

नागालैंड सरकार द्वारा दिए गए पूर्व संकेतों के बावजूद असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) स्थिति की गंभीरता का सही अंदाजा लगाने में विफल रहा। प्रभावी आंतरिक चेतावनी प्रणाली (Internal Warning System) के अभाव और शिवसागर व चराइदेव जिला प्रशासनों की पूर्व तैयारियों में कमी के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और कई स्थानों पर तटबंध टूट गए।

केंद्र सरकार का आश्वासन और राहत पैकेज

  • सहानुभूति व समीक्षा: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने स्थिति पर चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित अन्य नेताओं के साथ बाढ़ राहत की समीक्षा की तथा केंद्र से हर संभव मदद का भरोसा दिया।
  • 6-सदस्यीय केंद्रीय टीम: अंतर-मंत्रालयी समीक्षा टीम ने पूर्वी असम का दौरा कर नुकसान का आकलन पूरा कर लिया है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा घोषित प्रमुख राहत उपाय

असम सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए व्यापक वित्तीय एवं पुनर्वास सहायता की घोषणा की है:

  • मृतकों के परिवारों को सहायता: पूर्व घोषित ₹4 लाख के अतिरिक्त ₹5 लाख की अतिरिक्त अनुग्रह राशि (कुल ₹9 लाख)।
  • लापता व्यक्तियों के लिए: 30 दिनों से अधिक समय से लापता लोगों के परिवारों को ₹4 लाख की सहायता।
  • आपातकालीन वित्तीय मदद: 1 लाख से अधिक प्रभावित परिवारों को तत्काल जरूरतों के लिए ₹15,000 प्रति परिवार।
  • विशेष लाभ: ‘अरुणोदय’ योजना के लाभार्थियों व छात्रों को एकमुश्त वित्तीय सहायता।
  • ऋण में राहत: शिक्षा, वाहन, आवास व कृषि ऋणों की किस्तों (EMIs) पर 19 जुलाई 2026 से प्रभावी 6 महीने की मोरेटोरियम (स्थगन) अवधि।
  • धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों का जीर्णोद्धार: क्षतिग्रस्त पारंपरिक प्रार्थना स्थलों (नामघर) की मरम्मत हेतु प्रति नामघर ₹1.5 लाख।

स्वास्थ्य चेतावनी व हवाई सर्वेक्षण

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने 30 जुलाई को प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर राहत शिविरों में महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों की विशेष देखभाल का निर्देश दिया। उधर, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने बाढ़ का पानी उतरने के बाद टाइफाइड, पीलिया और पेचिश जैसी बीमारियों के फैलने की चेतावनी देते हुए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने को कहा है।

नागालैंड में अवैध खनन, संविधान का अनुच्छेद 371(A) और विफलताएं

सैटेलाइट न्यूज चैनलों और खोजी पत्रकारों की रिपोर्टों के अनुसार, नागालैंड के मोन, मोकोकचुंग और लोंगलेन्ग जिलों में व्यापक स्तर पर हो रहे कोयला, पत्थर और रेत खनन के कारण जंगलों का नाश हुआ है, जिससे मिट्टी की जल-धारण क्षमता घट गई है।

  • संवैधानिक अड़चन: नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने स्वीकार किया कि अनुच्छेद 371(A) के तहत जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर जनजातियों का पारंपरिक मालिकाना हक है। इसके चलते सरकार अवैध रैट-होल या ओपन-कास्ट खनन पर कड़े एहतियाती कदम उठाने में असमर्थ रहती है और उसकी भूमिका केवल राजस्व संग्रह तक सीमित है।
  • विपक्ष और उच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी: असम विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया ने दिखो नदी में हो रहे अवैध खनन के खिलाफ कई बार आवाज उठाई थी। गौहाटी उच्च न्यायालय ने 21 अक्टूबर 2019 को ही समर्पित ‘माइन्स एंड मिनरल्स टास्क फोर्स’ और नदी संरक्षण समिति बनाने का निर्देश दिया था, लेकिन असम सरकार की ओर से इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

असम सम्मिलित महासंघ नेता मतिउर रहमान तथा नदी विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि नागा पहाड़ियों में बेरोकटोक खनन से उफनती नदियों में बड़े पैमाने पर गाद जमा हुई, जिसने असम की निचली घाटियों में अब तक की सबसे भयानक बाढ़ में से एक को जन्म दिया।

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नव ठाकुरिया

लेखक गुवाहाटी स्थित एक पत्रकार हैं, जो विश्व भर के विभिन्न मीडिया संस्थानों के लिए नियमित रूप से लेखन करते हैं।