नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने अमेरिका से वर्चुअली जुड़कर बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर और चौंकाने वाले दावे किए हैं। तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार के तहत देश के हालात पर चिंता जताते हुए जॉय ने कहा कि बांग्लादेश धीरे-धीरे दूसरा पाकिस्तान बनता जा रहा है, जहाँ कट्टरपंथी इस्लामी तत्व बेखौफ होकर काम कर रहे हैं।

बांग्लादेश को एक विफल राष्ट्र बताते हुए उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले समय में यह दक्षिण एशियाई देश क्षेत्रीय आतंकवाद का प्रमुख गढ़ बन सकता है। उन्होंने दावा किया कि अवामी लीग सरकार के दौरान जेल भेजे गए सैकड़ों दोषी आतंकवादियों को हाल ही में रिहा कर दिया गया है। इसके अलावा, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समेत कई विदेशी एजेंसियां वहाँ सक्रिय हैं, जहाँ से वैश्विक आतंकवादियों की अगली पीढ़ी तैयार होने की आशंका है।
शेख हसीना की स्वदेश वापसी का संकल्प और कानूनी अड़चनें
दिसंबर 2024 में विरोध प्रदर्शनों के बाद से नई दिल्ली में स्वैच्छिक निर्वासन में रह रही 78 वर्षीय शेख हसीना ने ‘जीत के महीने’ (दिसंबर) में बांग्लादेश लौटने का संकल्प दोहराया है। उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना पर मिली जीत के कारण दिसंबर का महीना बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है।
हालांकि, उनकी वापसी की राह आसान नहीं है। ढाका की एक स्थानीय अदालत ने जुलाई-अगस्त के विरोध प्रदर्शनों के दौरान 1,400 लोगों की मौत के मामले में मानवता के खिलाफ अपराधों के तहत उन्हें मौत की सजा सुनाई है। तारिक रहमान सरकार 2013 की प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत से हसीना की वापसी की मांग कर रही है। वहीं, नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि प्रत्यर्पण का मामला कानूनी जांच के अधीन है और जब तक निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया का आश्वासन नहीं मिलता, भारत हसीना पर दबाव नहीं डालेगा।
भारत के लिए सुरक्षा चुनौतियाँ और कूटनीतिक जटिलताएँ
बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों और प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी के बढ़ते प्रभाव से भारत, विशेषकर उसके 6 करोड़ से अधिक आबादी वाले पूर्वोत्तर राज्यों के लिए गंभीर सुरक्षा चिंताएँ पैदा हो गई हैं।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: नई दिल्ली ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान को बिम्सटेक अध्यक्ष के रूप में सितंबर के ब्रिक्स सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया है, लेकिन घरेलू राजनीतिक दबाव के कारण ढाका ने इस यात्रा पर चुप्पी साध रखी है।
घुसपैठ की समस्या: असम और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती भारतीय राज्यों में बांग्लादेशी प्रवासियों का अवैध आगमन लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
नई दिल्ली का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने के लिए ढाका के साथ द्विपक्षीय संबंधों को पुनः मजबूत करना बेहद आवश्यक है।