शिमला : हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में पर्यटन विकास का मुद्दा छाया रहा। क्षेत्र की विधायक रीना कश्यप द्वारा मुख्यमंत्री से पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए सरकार ने सदन में स्पष्ट किया कि सिरमौर जिले के पच्छाद क्षेत्र में पर्यटन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं।
सदन के पटल पर रखी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में पर्यटन विभाग द्वारा अब तक लगभग 30 होटल व गेस्ट हाउस और 25 होमस्टे पंजीकृत किए जा चुके हैं। इसके साथ ही क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का कायाकल्प करने के लिए सरकार ने लाखों रुपये का बजट जारी कर विकास कार्यों को सिरे चढ़ाया है।

पर्यटन विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार सेरजगास को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 325.55 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके तहत एप्रोच रोड, एडवेंचर हट-कम-कैफेटेरिया, शौचालय ब्लॉक और चेंजिंग रूम का निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें से एप्रोच रोड का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। वहीं क्षेत्र के सुप्रसिद्ध भुरेश्वर महादेव मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए 34.50 लाख रुपये जारी कर कार्य संपन्न करा लिया गया है। इसके अतिरिक्त, राजगढ़ क्षेत्र में स्थित भगवान शिरगुल महाराज की पावन जन्मस्थली शाया मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए स्वीकृत 25 लाख रुपये की लागत से विकास कार्य पूरा कर लिया गया है।
हाब्बन, पझौता और सराहां जैसे प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर क्षेत्रों को पर्यटन मानचित्र पर उभारने के सवाल पर सरकार ने बताया कि पूरे प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘हिमाचल प्रदेश होम स्टे नियम, 2025’ लागू किए गए हैं। इस नीति के तहत नया होमस्टे बनाने या पुराने होमस्टे को अपग्रेड करने के लिए लिए जाने वाले ऋण पर 3 से 5 प्रतिशत तक का ब्याज उपदान (ब्याज सब्सिडी) 3 वर्षों के लिए दिया जा रहा है, जो 1 दिसंबर 2027 तक प्रभावी रहेगा। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि यदि पच्छाद के हाब्बन या पझौता जैसे स्थानों के विकास से संबंधित कोई विशेष प्रस्ताव प्राप्त होता है, तो उस पर नियमानुसार प्राथमिकता से विचार किया जाएगा।