नाहन: जिला सिरमौर के दूरदराज क्षेत्र शिलाई के एक होनहार सपूत ने भारतीय सेना में अधिकारी बनकर पूरे प्रदेश का नाम देश भर में रोशन किया है। सिरमौर जिला की तहसील शिलाई के गांव कुजनाल, डाकघर लोजा मनाल के मूल निवासी विवेक चौहान भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट कमीशन हुए हैं। लेफ्टिनेंट विवेक चौहान ने चार वर्षों के बेहद कड़े सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद यह गौरवपूर्ण मुकाम हासिल किया है।

विवेक चौहान की इस ऐतिहासिक सफलता से न केवल उनके पैतृक गांव कुजनाल और शिलाई क्षेत्र में जश्न का माहौल है, बल्कि यह समूचे सिरमौर और हिमाचल प्रदेश के लिए बड़े गर्व का विषय है। लेफ्टिनेंट विवेक चौहान ने भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी विंग में शामिल होने के लिए लंबी और कठिन तपस्या की है। विवेक ने शुरुआती तीन वर्षों का अत्यंत कठिन और अनुशासित सैन्य प्रशिक्षण पुणे स्थित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में पूरा किया। इसके बाद उन्होंने देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में एक वर्ष का प्री-कमीशन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पास कर देश सेवा की कसम खाई।
यह पासिंग आउट परेड चौहान परिवार के लिए केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाला क्षण बन गई, क्योंकि ठीक 24 वर्ष पूर्व इतिहास के पन्ने इसी तरह सजे थे। ठीक 24 साल पहले वर्ष 2002 में विवेक के पिता कर्नल जे.एस. चौहान स्वयं इसी आईएमए (IMA) की ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वायर से पास आउट होकर भारतीय सेना में अधिकारी बने थे। उस समय कर्नल चौहान के कंधों पर उनके माता-पिता और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मोनिका चौहान ने पिप (स्टार) लगाए थे।
आज 24 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, उसी ऐतिहासिक मैदान पर उसी परिवार ने अपनी अगली पीढ़ी यानी पुत्र विवेक चौहान के कंधों पर कर्नल पिता और माता ने सितारे सजाकर देश सेवा की इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाया।
आईएमए के पासिंग आउट ग्राउंड पर जब विवेक चौहान के कंधों पर लेफ्टिनेंट के सितारे चमके, तो वहां मौजूद उनकी दादी श्रीमती चानोनो चौहान, माता श्रीमती मोनिका चौहान, बड़े भाई रजत चौहान और स्वयं पिता कर्नल जे.एस. चौहान की आंखें खुशी और गर्व से भर आईं। यह क्षण इस राजपूत परिवार के लिए पीढ़ियों से चली आ रही राष्ट्रसेवा, सैन्य सम्मान और देश के प्रति समर्पण की परंपरा का एक जीवंत प्रतीक बन गया।
शिलाई जैसे पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित सैन्य अकादमी के शीर्ष पायदान पर पहुंचना लेफ्टिनेंट विवेक चौहान की अटूट मेहनत को दर्शाता है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि विवेक की यह बड़ी उपलब्धि गांव कुजनाल और पूरे शिलाई क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं के लिए एक महान प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने साबित कर दिया है कि यदि मन में पक्का अनुशासन, कड़ा परिश्रम और दृढ़ संकल्प हो, तो विपरीत परिस्थितियों में भी देश के सर्वोच्च पदों पर पहुंचने का हर सपना साकार किया जा सकता है।