नाहन : हिमाचल प्रदेश में नशे के सौदागरों और सीमा पार से चल रहे नारको-आतंकवाद पर सिरमौर पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और करारी स्ट्राइक की है। पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भारतीय सीमा में गिराई जाने वाली हेरोइन (चिट्टा) को हिमाचल और आसपास के राज्यों में सप्लाई करने वाले अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने मुख्य सरगना को पंजाब के तरनतारन स्थित भारत-पाक सीमा के पास से गिरफ्तार किया है। काला अंब में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) सिरमौर नरेंद्र कुमार ने इस पूरे हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन का खुलासा किया।
294 ग्राम हेरोइन से सुलझी अंतर्राष्ट्रीय साजिश
इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ उस समय शुरू हुआ जब 11 अप्रैल 2026 को काला अंब पुलिस की एक स्पेशल गश्ती टीम ने दो तस्करों—आकाशदीप और रणजीत को 294 ग्राम हेरोइन के साथ दबोचा था। हालांकि, उस वक्त मौके का फायदा उठाकर गाड़ी का चालक फरार हो गया था। पुलिस ने ढिलाई न बरतते हुए तुरंत जांच आगे बढ़ाई और फरार गाड़ी के मालिक गंधर्व थापर को पंचकूला से दबोचकर पूछताछ शुरू की।

तरनतारन से खुला ‘ड्रोन कनेक्शन’
हिरासत में लिए गए तस्करों के कॉल रिकॉर्ड्स, लोकेशन डेटा और डिजिटल फॉरेंसिक जांच से पुलिस के हाथ बेहद अहम सुराग लगे, जिनके तार पंजाब के सरहदी जिले तरनतारन से जुड़ रहे थे। साइबर इनपुट के आधार पर सिरमौर पुलिस की टीम ने 17 मई 2026 को तरनतारन में रेड मारकर विरेंद्र पाल नामक व्यक्ति को दबोचा। विरेंद्र पाल ने कड़ाई से हुई पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा किया कि भारत में खपाई जा रही यह हेरोइन सीमा पार (पाकिस्तान) से ड्रोन के जरिए भारतीय सीमा में ड्रॉप की जाती थी।
बॉर्डर के पास बिछाया जाल, मुख्य सरगना गिरफ्तार
पाकिस्तान से सीधे जुड़े तार सामने आते ही थाना प्रभारी (SHO) कुलवंत सिंह कंवर के नेतृत्व में सिरमौर पुलिस और साइबर सेल की एक संयुक्त टास्क फोर्स गठित की गई। हफ्तों की कड़ी सर्विलांस और सटीक ह्यूमन इंटेलिजेंस के बाद पुलिस टीम ने पाकिस्तान बॉर्डर से सटे तरनतारन इलाके में दबिश देकर इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड उमर बीर सिंह को बेड़ियों में जकड़ लिया।
देश की सुरक्षा पर चोट करने वाले नारको-नेटवर्क का अंत
मुख्य सप्लायर उमर बीर सिंह की गिरफ्तारी के साथ ही सिरमौर पुलिस ने पाकिस्तान से शुरू होकर पंजाब के रास्ते हिमाचल तक फैले इस नशा चक्रव्यूह की पूरी श्रृंखला को तोड़ दिया है। पुलिस कप्तानों का मानना है कि यह केवल नशे की जब्ती का मामला नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने वाले सीमा पार के नारको-सिंडिकेट पर एक बड़ा प्रहार है। फिलहाल पुलिस टीम पकड़े गए आरोपियों को रिमांड पर लेकर यह खंगाल रही है कि हिमाचल और पड़ोसी राज्यों में उनके और कौन-कौन से मददगार सक्रिय थे।