हिमाचल की पंचायतें सरकार की निगरानी में, सरकारी भर्तियों से पहले होगा चिट्टा टेस्ट

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By Hills Post

शिमला: हिमाचल प्रदेश को नशे से बाहर निकालने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चिट्टा (हेरोइन) के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए अब केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए उनकी संपत्तियों को भी ध्वस्त किया जाएगा।

हिमाचल के इतिहास में पहली बार पंचायत स्तर पर नशे की स्थिति का विस्तृत वर्गीकरण किया गया है। सर्वे और पुलिस रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश की 234 पंचायतों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। रेड जोन, जहाँ नशे का प्रभाव सबसे अधिक है और तस्करी का नेटवर्क सक्रिय है। येलो जोन, जहाँ नशा पैर पसार रहा है और सतर्कता की आवश्यकता है। ग्रीन जोन, जो नशा मुक्त हैं या जहाँ स्थिति नियंत्रण में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 12 हजार ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जो नशे की चपेट में हैं।

प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पुलिस भर्ती की तर्ज पर अब अन्य सभी सरकारी भर्तियों में भी चिट्टा टेस्ट अनिवार्य करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि नशे से जुड़े युवाओं को सरकारी सेवा में स्थान नहीं दिया जाएगा।

नशे में संलिप्त 123 सरकारी कर्मचारियों में से अब तक 31 को बर्खास्त किया जा चुका है (जिनमें 21 पुलिसकर्मी शामिल हैं)। करीब 90 अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। प्रदेश में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत अब तक की गई कार्रवाई के आंकड़े सरकार की सख्ती को दर्शाते हैं। मुख्यमंत्री ने फार्मा कंपनियों और मेडिकल स्टोर संचालकों को चेतावनी दी है कि यदि वे नशे के कारोबार में संलिप्त पाए गए, तो उनका लाइसेंस तत्काल रद्द होगा।

नशे के खिलाफ इस लड़ाई को एक सामाजिक आंदोलन बनाने के लिए अभियान का दूसरा चरण 1 जून से 20 अगस्त तक चलेगा। हर जिले के उपायुक्त (DC) स्वयं 10 शिक्षण संस्थानों और 10 पंचायतों का दौरा करेंगे। स्कूलों, कॉलेजों और पंचायतों में वॉकथॉन और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें मुख्यमंत्री स्वयं भी हिस्सा लेंगे।

सरकार केवल दंड नहीं, बल्कि सुधार की नीति पर भी काम कर रही है। सरकार का मानना है कि नशा पीड़ितों का सही इलाज और पुनर्वास उन्हें फिर से समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आवश्यक है।

हिमाचल जैसे शांत राज्य में ‘चिट्टा’ का फैलना एक गंभीर सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य संकट है। सुक्खू सरकार की यह बहुआयामी रणनीति जिसमें कड़ा प्रहार, प्रशासनिक शुद्धिकरण, जागरूकता और पुनर्वास शामिल हैं। नशे के सौदागरों के बीच खौफ पैदा करने और देवभूमि की नई पीढ़ी को सुरक्षित रखने की दिशा में एक ठोस कदम है।

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