सोलन: हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति का 21वां तीन दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन कला मंच, कोठों सोलन में विस्तृत विचार-विमर्श और नीतिगत रणनीतियों को अंतिम रूप देने के बाद सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस महाधिवेशन के अंतिम दिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सर्वसम्मति से समिति की 35 सदस्यीय नई राज्य कार्यकारिणी तथा 11 सदस्यीय कोर ग्रुप का गठन किया गया। इसके साथ ही, देवभूमि में सामाजिक चेतना जगाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन, लैंगिक समानता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और युवाओं में बढ़ते नशे के खिलाफ पांच बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।

सम्मेलन के चुनावी सत्र में सर्वसम्मति से चुनी गई 11 सदस्यीय कोर टीम में प्रो. टी.डी. वर्मा को नया राज्य अध्यक्ष चुना गया है। उनके साथ डॉ. आर.के. शर्मा, भीम सिंह, सुमित्रा चंदेल व जोगिन्द्र चौहान को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सत्यवान पुंडीर को पुनः महासचिव मनोनीत किया गया है, जबकि गजेंद्र शर्मा, सुनीता बिष्ट, सीताराम ठाकुर व प्रोमिला बासु को सह-सचिव और जियानन्द शर्मा को कोषाध्यक्ष पद का कार्यभार सौंपा गया है।
इसके अतिरिक्त, संगठन की रीढ़ मानी जाने वाली 35 सदस्यीय राज्य कार्यकारिणी में प्रदेशभर के सक्रिय चेहरों को शामिल किया गया है, जिनमें मुख्य रूप से नवल किशोर, भोला दत्त, सेवक राम, रीना, ऋत्विक, विनय, लाल मन, जयंत शर्मा, उर्मिल ठाकुर, हीरा लाल, धनी राम, गुलपाल, वीरेंद्र कपूर, संत राम चौहान, राजेश तोमर, डॉ. आर.के. जिष्टू, मनसा राम, विजय ठाकुर, पी.सी. मिन्हास, अजय, राकेश अरोड़ा, संजय चौधरी, शेर सिंह तथा मोहित नेगी शामिल हैं। राज्य ज्ञान विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. ओम प्रकाश भूरेटा और तकनीकी एवं विकास समिति के सचिव जोगिन्दर वालिया को संगठन का स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।
तीन दिनों तक चले विभिन्न वैचारिक सत्रों में देश-प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों, शिक्षा व स्वास्थ्य के गिरते स्तर, पर्यावरण संकट और सामाजिक न्याय जैसे ज्वलंत विषयों पर गहन महामंथन हुआ। सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि सभी डेलीगेट्स ने एक सुर में ‘युवाओं में बढ़ते नशे के विरुद्ध व्यापक जन-जागरण अभियान’ को समिति का मुख्य केंद्रीय अभियान बनाने का सर्वसम्मत निर्णय लिया। बुद्धिजीवियों ने जोर देकर कहा कि आज की युवा पीढ़ी को नशे की गर्त से निकालकर उनमें वैज्ञानिक सोच, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक समानता के भाव जगाना अनिवार्य है, क्योंकि इसके बिना एक प्रगतिशील समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।
इस महाधिवेशन में देश के कोने-कोने से आए जन विज्ञान आंदोलन के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया, जिनमें अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क की महासचिव आशा मिश्रा, भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. काशीनाथ चटर्जी। हरियाणा से प्रो. प्रमोद गौरी व मनीषा हंस, जन स्वास्थ्य अभियान के राष्ट्रीय सह संयोजक प्रो. इंद्रनील। उत्तराखंड से डॉ. एस.पी. सेमवाल, डॉ. उमा भट्ट व कमलेश खंतवाल, पंजाब से डॉ. कुलविंदर सिंह तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) से प्रो. एस.एन. घोष ने अपने बहुमूल्य शोधपत्र और विचार प्रस्तुत किए।
समापन सत्र के दौरान सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं सोलन के जिलाध्यक्ष डॉ. बी.एस. पंवार ने तीन दिनों तक व्यवस्थाओं को सुचारू रखने और सम्मेलन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए सरकारी विभागों, स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवियों, मीडिया और सोलन की प्रबुद्ध जनता का तहे दिल से आभार व्यक्त किया। अंत में, नवनिर्वाचित राज्य अध्यक्ष प्रो. टी.डी. वर्मा ने राज्य के विभिन्न कोनों से मौसम की चुनौतियों को पार कर पहुंचे 215 डेलीगेट्स, पर्यवेक्षकों और वालंटियर्स का धन्यवाद करते हुए संकल्प लिया कि सम्मेलन में पारित सभी पांचों प्रस्तावों को कागजों से निकालकर जल्द ही धरातल पर एक बड़े जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा।