अल्टो कार से शुरू हुआ मुख्यमंत्री का सफर आलीशान गाड़ियों, दफ्तरों और कोठियों तक पहुंचा: डॉ. बिंदल

Photo of author

By पंकज जयसवाल

शिमला : भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का अल्टो कार से शुरू हुआ सफर अब आलीशान गाड़ियों, करोड़ों रुपये के दफ्तरों और कोठियों तक पहुंच चुका है। दूसरी तरफ प्रदेश की जनता पर कर्ज, टैक्स और महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। यही कांग्रेस सरकार के तथाकथित व्यवस्था परिवर्तन की वास्तविक तस्वीर है।

डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि आम आदमी को मिलने वाली राहतों में लगातार कटौती की जा रही है। बिजली सब्सिडी में बदलाव किया गया, बिजली पर विभिन्न सेस लगाए गए, स्टाम्प ड्यूटी और एचआरटीसी से जुड़ी रियायतों में बदलाव हुआ, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों के लिए महंगे और सुविधाओं से लैस कार्यालयों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि सरकारी अस्पतालों में गरीब और बीमार व्यक्ति से पर्ची बनाने के लिए ₹10 तक लिए जा रहे हैं। हिमकेयर के तहत उपचार को लेकर लोगों और अस्पतालों की समस्याएं सामने आती रही हैं, लेकिन सरकार अपनी सुख-सुविधाओं पर खर्च करने में पीछे नहीं है।

डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रदेश के पेंशनर्स अपनी देनदारियों और समय पर पेंशन के लिए आवाज उठा रहे हैं। बेरोजगार युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं और कांग्रेस द्वारा चुनाव से पहले किया गया एक लाख सरकारी नौकरियों का वादा आज युवाओं के लिए छलावा बनकर रह गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की बहनें अपने चुनावी वादों की ओर सरकार का ध्यान दिला रही हैं, जबकि आम परिवार बिजली, पानी, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े बढ़ते खर्च से परेशान है। स्कूलों को बंद और मर्ज करने के फैसलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ाई है।

डॉ. बिंदल ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक तरफ आलीशान कार्यालयों के उद्घाटन किए जा रहे हैं और दूसरी तरफ जनता की सेवा तथा विकास कार्यों के लिए स्थापित सरकारी कार्यालयों को बंद या पुनर्गठित किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में नेशनल हाईवे से संबंधित एक डिवीजन और आठ सब-डिवीजन बंद करने की अधिसूचना जारी की गई। उन्होंने कहा कि ये कार्यालय सड़क निर्माण, मरम्मत और क्षेत्रीय विकास कार्यों के लिए बनाए गए थे। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन्हें बंद करने से संबंधित क्षेत्रों की जनता और सड़क परियोजनाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

बिंदल ने कहा, “गरीब आदमी की राहत के लिए पैसा नहीं, हिमकेयर के लिए पैसा नहीं, विकास के कार्यालय चलाने के लिए पैसा नहीं, लेकिन सत्ता की सुख-सुविधाओं और आलीशान कार्यालयों के लिए करोड़ों रुपये उपलब्ध हैं—क्या इसी का नाम व्यवस्था परिवर्तन है?”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को अपनी प्राथमिकताएं बदलनी चाहिए। सरकारी संसाधनों का पहला अधिकार प्रदेश की जनता, गरीब, किसान, कर्मचारी, पेंशनर, महिला और बेरोजगार युवा का होना चाहिए, न कि सत्ता में बैठे लोगों की सुविधाओं का।

डॉ. बिंदल ने कहा कि अल्टो कार से शुरू हुए सफर और आज की सरकारी सुख-सुविधाओं के बीच का अंतर प्रदेश की जनता देख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णयों और खर्च का राजनीतिक हिसाब जनता स्वयं करेगी और आगामी विधानसभा चुनाव में अपना फैसला देगी।

Photo of author

पंकज जयसवाल

पंकज जयसवाल, हिल्स पोस्ट मीडिया में न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर खबरों को कवर करते हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 2 वर्षों का अनुभव है। इससे पहले वह समाज सेवी संगठनों से जुड़े रहे हैं और हजारों युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा देने के साथ साथ रोजगार दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।