नाहन : आज नाहन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं द्वारा ‘आशा दिवस’ का आयोजन अत्यंत उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस विशेष अवसर पर एकत्रित हुई आशा कार्यकर्ताओं ने केक काटकर एक-दूसरे को बधाई दी और अपनी वर्षों की निस्वार्थ सेवा यात्रा का जश्न मनाया।
कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने आशा योजना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके प्रेरणास्रोतों को याद किया। उल्लेखनीय है कि भारत में Accredited Social Health Activist यानी ‘आशा’ की अवधारणा को साकार करने और समुदाय-केंद्रित स्वास्थ्य मॉडल को विकसित करने में महाराष्ट्र के गडचिरोली में कार्यरत प्रसिद्ध चिकित्सक दंपति डॉ. अभय बंग और डॉ. रानी बंग के ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यों का विशेष योगदान रहा है। उनके इसी मॉडल ने यह साबित किया कि स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षित कर ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य क्रांति लाई जा सकती है।

आज आशा कार्यकर्ता केवल एक स्वास्थ्य कर्मी नहीं, बल्कि हर ग्रामीण परिवार की सबसे भरोसेमंद साथी बन चुकी हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कराने से लेकर नवजात शिशुओं की सुरक्षा, समय पर टीकाकरण, कुपोषण से बचाव, परिवार नियोजन, स्वच्छता अभियान और विभिन्न महामारी रोकथाम अभियानों तक में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका अग्रिम पंक्ति की रही है।
‘आशा’ शब्द अपने आप में ही उम्मीद का प्रतीक है। जब किसी दूरदराज गांव में मां और बच्चा दोनों सुरक्षित रहते हैं, तो उसके पीछे इन कार्यकर्ताओं की अनथक मेहनत छिपी होती है। नाहन में आयोजित इस कार्यक्रम में मीना शर्मा, सबीना, कुसुम, शमीम, कमलेश, हरविंदर, गुरजीत, अनीता, रेखा, निशा, अनीषा और हर्षिता सहित अनेक आशा कार्यकर्ता उपस्थित रहीं। सभी ने एक-दूसरे के समर्पण की सराहना की और भविष्य में भी इसी सेवाभाव के साथ स्वस्थ समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।