नाहन: जिला मुख्यालय नाहन स्थित डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हुए हैं। ‘ड्रॉप्स ऑफ होप सोसाइटी सिरमौर’ (Drops of Hope Society Sirmour) के अध्यक्ष ईशान राव ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि साल 2017 से लगातार मेडिकल कॉलेज में ब्लड कॉम्पोनेंट सेपरेटर (Blood Component Separator) मशीन लगाने की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। करीब 9 साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी इस जीवनरक्षक सुविधा का न होना बेहद चिंताजनक है।
ईशान राव ने आगामी मानसून और बरसात के मौसम को देखते हुए एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने बताया कि हिमाचल और विशेषकर सिरमौर जिला में बरसात के मौसम के दौरान डेंगू, स्क्रब टाइफस और अन्य मौसमी बीमारियाँ फैलने का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है। इन बीमारियों के प्रकोप के दौरान मरीजों के शरीर में प्लेटलेट्स (Platelets) की भारी कमी हो जाती है, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है। ऐसी स्थिति में ब्लड कॉम्पोनेंट सेपरेटर मशीन की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस होती है, क्योंकि यह मशीन खून से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और रेड ब्लड सेल्स को अलग करने का काम करती है।

सोसाइटी के अध्यक्ष ने अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि नाहन मेडिकल कॉलेज में इस मशीन के न होने के कारण आपातकाल की स्थिति में मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने के लिए चंडीगढ़ या अन्य बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। गरीब और आम जनता के लिए समय पर प्लेटलेट्स का इंतजाम करना और मरीज को बाहर ले जाना बेहद खर्चीला और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला साबित होता है। कई बार तो गंभीर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
‘ड्रॉप्स ऑफ होप सोसाइटी’ ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से पुरजोर मांग की है कि बरसात का मौसम पूरी तरह सक्रिय होने से पहले नाहन मेडिकल कॉलेज में प्राथमिकता के आधार पर ब्लड कॉम्पोनेंट सेपरेटर मशीन स्थापित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो बरसात के दिनों में डेंगू के मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन और सरकार की होगी।