नौणी यूनिवर्सिटी और देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के बीच बढ़ेगा सहयोग

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार का दौरा किया। कुलपति डॉ. एच.एस. बवेजा के नेतृत्व में हुई यह यात्रा दोनों संस्थानों के बीच अनुसंधान, शिक्षा, प्रौद्योगिकी के व्यवसायीकरण तथा ग्रामीण उद्यमिता विकास के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को तलाशने की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल साबित हुई है।

औद्यानिकी, वानिकी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नौणी विश्वविद्यालय जहां देश का एक अग्रणी संस्थान है, वहीं देव संस्कृति विश्वविद्यालय पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, औषधीय रसायन विज्ञान तथा पंचगव्य के चिकित्सीय अनुप्रयोगों पर अपने बेहतरीन कार्य के लिए जाना जाता है। इस प्रस्तावित सहयोग का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक एवं प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों के साथ जोड़कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नवाचार आधारित अनुसंधान तथा औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए एक सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। इस साझेदारी के तहत विशेष रूप से गो-आधारित उप-उत्पादों, खासकर गोबर एवं गोमूत्र के मूल्य संवर्धन, उन्नत प्रसंस्करण तकनीकों के विकास और उनकी व्यावसायिक संभावनाओं के दोहन पर विशेष बल दिया जाएगा।

दौरे के दौरान नौणी विश्वविद्यालय की टीम ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान के उन्नत गोपालन केंद्रों तथा गोबर एवं गोमूत्र के उपयोग से संबंधित विशेष प्रसंस्करण इकाइयों का भी जमीनी निरीक्षण किया। इसके अलावा टीम ने उन निर्माण इकाइयों को भी देखा जहां इन जैविक संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग कर कपड़े और कागज जैसे पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जो आज के समय में परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) तथा अपशिष्ट से संपदा (वेस्ट टू वेल्थ) आधारित उद्यमिता के सफल मॉडल प्रस्तुत करते हैं।

दौरे के एक हिस्से के रूप में कुलपति डॉ. एच.एस. बवेजा ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या के साथ एक विशेष बैठक की, जिसमें दोनों पक्षों ने संस्थागत सहयोग की संभावनाओं तथा एक व्यापक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के माध्यम से इस साझेदारी को जल्द ही औपचारिक रूप देने पर सहमति व्यक्त की। इस दौरे का एक प्रमुख आकर्षण वहां के विद्यार्थियों एवं युवा उद्यमियों के साथ आयोजित संवादात्मक सत्र रहा, जहां प्रतिनिधिमंडल ने देखा कि कैसे कौशल विकास के माध्यम से युवा जैविक अपशिष्ट को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों की आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। इस प्रस्तावित सहयोग से वानिकी शिक्षा, खाद्य विज्ञान और सतत ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

नौणी के इस महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल में अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य, वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. सी.एल. ठाकुर, पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल हांडा, पुष्प विज्ञान एवं भू-दृश्य वास्तुकला विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बी.एस. दिल्टा, संयुक्त अनुसंधान निदेशक डॉ. विशाल राणा तथा सिल्वीकल्चर एवं कृषि वानिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित वशिष्ठ विशेष रूप से शामिल रहे।

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संजीव अवस्थी

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