नौणी यूनिवर्सिटी ने एग्री-टेक प्लेटफॉर्म क्रॉपवेव के साथ किया MoU, किसानों तक पहुंचेगी डिजिटल बागवानी सलाह

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By Hills Post

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी ने राज्य में डिजिटल कृषि, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, किसान जागरूकता तथा क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रोहड़ू स्थित उभरते एग्री-टेक प्लेटफॉर्म क्रॉपवेव के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस रणनीतिक साझेदारी का मुख्य ध्येय वैज्ञानिक अनुसंधान को आधुनिक डिजिटल तकनीकों से जोड़ते हुए किसानों, विद्यार्थियों तथा अन्य हितधारकों तक बागवानी संबंधी नवाचारों की सीधी व प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करना है।

पाँच वर्ष की अवधि के लिए तय किए गए इस समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर डिजिटल माध्यमों से वैज्ञानिक बागवानी ज्ञान का प्रसार करेंगे और प्रौद्योगिकी आधारित सलाहकार सेवाओं को मजबूत करेंगे। इसके साथ ही कृषि-बागवानी में नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने, विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप, कौशल विकास और अनुभवात्मक शिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने तथा टिकाऊ एवं जलवायु-अनुकूल बागवानी पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के लिए भी संयुक्त रूप से काम किया जाएगा।

विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा तथा क्रॉपवेव के मुख्य कार्यकारी अधिकारी परवंत सामता ने आधिकारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य, कुलपति के ओएसडी डॉ. अनिल हांडा, वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. के.के. रैना, डॉ. भूपेश गुप्ता, अनिल गुप्ता तथा क्रॉपवेव की ओर से महेश ठाकुर, निशांत सामता और नवीन सांगतन विशेष रूप से उपस्थित रहे। समझौते के अंतर्गत विश्वविद्यालय और क्रॉपवेव संयुक्त रूप से किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, क्षमता निर्माण कार्यशालाएँ, कौशल विकास पाठ्यक्रम तथा आधुनिक बागवानी तकनीकों पर जागरूकता अभियान आयोजित करेंगे। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय द्वारा विकसित प्रमाणित पौध सामग्री, गुणवत्तापूर्ण उत्पादों, मृदा, जल एवं पौध स्वास्थ्य से संबंधित जांच व परामर्श सेवाओं तथा गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज को बढ़ावा देना भी इस साझेदारी का प्रमुख हिस्सा रहेगा।

इस साझेदारी में क्रॉपवेव की मुख्य भूमिका किसानों तक सीधा डिजिटल नेटवर्क बनाने, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित जानकारी का प्रसार करने तथा संयुक्त रूप से स्वीकृत कार्यक्रमों के संचालन में आवश्यक सहयोग देने की रहेगी। वहीं, विश्वविद्यालय अपने अनुसंधान आधारित सुझाव, शैक्षणिक सामग्री एवं तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा तथा जारी की जाने वाली सामग्री की प्रामाणिकता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा। इस एमओयू के तहत फिलहाल किसी भी पक्ष पर कोई तत्काल वित्तीय दायित्व नहीं होगा और सहयोग के प्रारंभिक क्रियान्वयन का मूल्यांकन करने के लिए तीन माह का पायलट चरण निर्धारित किया गया है।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने कहा कि बागवानी का भविष्य वैज्ञानिक अनुसंधान और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के प्रभावी समन्वय में निहित है। क्रॉपवेव के साथ यह साझेदारी विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसके तहत अनुसंधान को प्रयोगशालाओं और कक्षाओं से निकालकर डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे किसानों के सेब बगीचों और खेतों तक पहुँचाया जाएगा।

बता दें कि क्रॉपवेव एक डेटा-आधारित, युवाओं द्वारा संचालित एकीकृत एग्रीटेक एवं बागवानी नवाचार मंच है, जिसे बागवानी उद्योग के लिए ‘वन-स्टॉप’ इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। यह मंच फसल प्रबंधन, डेटा आधारित निर्णय प्रणाली,

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