नौणी यूनिवर्सिटी में स्थापित होगा उत्तरी क्षेत्र-1 का क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र

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By Hills Post

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी को एक और बड़ी राष्ट्रीय सफलता मिली है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अधीन संचालित राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के उत्तरी क्षेत्र-1 का क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र अब नौणी विश्वविद्यालय में स्थापित किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित केंद्र के संचालन के लिए विश्वविद्यालय का चयन एक कड़ी देशव्यापी प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के उपरांत हुआ है।

विश्वविद्यालय की अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य के नेतृत्व में इस महत्वाकांक्षी केंद्र की स्थापना हेतु विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस परियोजना में वन उत्पाद विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. रोहित शर्मा को समन्वयक तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. पंकज कुमार को सह-समन्वयक बनाया गया है। इस प्रस्ताव को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की विशेषज्ञ समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, जिसमें नौणी विश्वविद्यालय के विश्वस्तरीय अनुसंधान इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी विशेषज्ञता और औषधीय व सुगंधित पौधों के क्षेत्र में अब तक किए गए उल्लेखनीय कार्यों को प्रमुखता से सराहा गया।

यह क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र इससे पूर्व मंडी जिले के जोगिन्दर नगर स्थित रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन में संचालित हो रहा था, जिसे अब आधिकारिक रूप से नौणी विश्वविद्यालय को हस्तांतरित कर दिया गया है। नौणी स्थित यह केंद्र अब उत्तरी भारत के 7 प्रमुख राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की विभिन्न योजनाओं, अनुसंधान परियोजनाओं और कार्यक्रमों का केंद्रीय समन्वय करेगा।

यह केंद्र संपूर्ण उत्तरी भारत में औषधीय पादप क्षेत्र को वैज्ञानिक एवं आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए एक वन-स्टॉप क्षेत्रीय हब के रूप में कार्य करेगा। इसके तहत औषधीय एवं जड़ी-बूटियों के पौधों का वैज्ञानिक संरक्षण, उन्नत खेती, प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन किया जाएगा। साथ ही, गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज और गुड फील्ड कलेक्शन प्रैक्टिस जैसी आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि बाजार में गुणवत्तापूर्ण कच्चा माल उपलब्ध हो सके। यह केंद्र जड़ी-बूटी उगाने वाले किसानों को सीधा बाजार उपलब्ध कराने, तकनीक हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी मददगार बनेगा। इसके अतिरिक्त, यह औषधीय पादप क्षेत्र के लिए नई परियोजनाओं के विकास, प्रलेखन तथा आयुष नीति निर्धारण में केंद्र सरकार को तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।

इस शानदार राष्ट्रीय उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई देते हुए नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने कहा कि विश्वविद्यालय का इस प्रतिष्ठित केंद्र के रूप में चुना जाना पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए अत्यंत गर्व का विषय है, जो औषधीय पौधों के क्षेत्र में उच्चस्तरीय शोध, नवाचार और किसान-केंद्रित विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि यह केंद्र अब शोधकर्ताओं, जड़ी-बूटी उत्पादक किसानों, उद्योगपतियों और सरकारी संस्थाओं को एक मंच पर लाएगा, जिससे उत्तर भारत में औषधीय पौधों की सतत खेती, संरक्षण और मूल्य संवर्धन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। कुलपति ने इस राष्ट्रीय सफलता के लिए डॉ. देविना वैद्य, डॉ. रोहित शर्मा, डॉ. पंकज कुमार और पूरी टीम की सराहना की।

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