नौणी विश्वविद्यालय में कट एवं पॉटेड फूल पर आयोजित हुआ विशेष प्रशिक्षण शिविर

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By Hills Post

सोलन: हिमाचल प्रदेश की अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियों का भरपूर लाभ उठाकर विभिन्न पुष्पीय फसलों की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि किसान अपनी पारंपरिक खेती में विविधता लाने के साथ-साथ अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकें। यह महत्वपूर्ण बात डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के कुलपति प्रो. एचएस बवेजा ने सोलन और सिरमौर जिलों से आए किसानों को संबोधित करते हुए कही।

विश्वविद्यालय के ‘पुष्प विज्ञान एवं लैंडस्केप आर्किटेक्चर विभाग’ द्वारा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत कट एवं पॉटेड फूल विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण शिविर में नौणी, शमरोड़, दाड़ो देवरिया और कोटला पंजोला पंचायतों के कुल 51 प्रगतिशील किसानों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

कुलपति और डीन के प्रेरक विचार

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एचएस बवेजा ने स्वरोजगार, आय सृजन और निर्यात के क्षेत्र में पुष्प उत्पादन की असीम संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने आसपास की पंचायतों के किसानों से आह्वान किया कि वे व्यावसायिक पुष्प उत्पादन इकाइयां स्थापित करें और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार व आजीविका के नए अवसर सृजित करने के लिए विश्वविद्यालय में उपलब्ध तकनीकी विशेषज्ञता का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने पुष्प उत्पादन को आर्थिक रूप से अधिक व्यवहार्य बनाने के लिए उन्नत तकनीकों और वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित पद्धतियों को अपनाने पर विशेष बल दिया।

औद्यानिकी महाविद्यालय के डीन डॉ. मनीष शर्मा ने बागवानी में विविधीकरण के महत्व को रेखांकित करते हुए किसानों को इस क्षेत्र के अनुकूल उच्च मूल्य (High Value) वाली पुष्पीय फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि पुष्प उत्पादन किसानों को बाजारोन्मुख उत्पादन की ओर बढ़ने का सुनहरा अवसर देता है, जिससे उद्यमिता और रोजगार की व्यापक संभावनाएं विकसित होती हैं।

वैज्ञानिकों द्वारा दी गई तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी

इससे पहले, पुष्प विज्ञान एवं लैंडस्केप आर्किटेक्चर विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बी.एस. डिल्टा ने किसानों के बीच पुष्प उत्पादन को बढ़ावा देने तथा व्यावसायिक खेती शुरू करने के लिए विभाग द्वारा दिए जा रहे तकनीकी सहयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय किसानों को तकनीकी जानकारी, उपयुक्त रोपण सामग्री, ग्रोइंग मीडिया तथा पुष्प व अन्य बागवानी फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों के संबंध में निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करता है। डॉ. भारती कश्यप ने इस अवसर पर चल रही परियोजना की विस्तृत जानकारी उपस्थित किसानों के साथ साझा की।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान विभाग के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने किसानों को कट, लूज (खुले) एवं पॉटेड (गमले वाले) फूलों के उत्पादन के विभिन्न पहलुओं पर बारीकी से तकनीकी जानकारी दी। किसानों को गुलदाउदी, गुलाब, बर्ड ऑफ पैराडाइज, लिलियम, हाइड्रेंजिया, ग्लेडियोलस और ऑर्किड जैसी प्रमुख कट फ्लावर फसलों के साथ-साथ गेंदा जैसी लूज फ्लावर फसलों की आधुनिक उत्पादन तकनीकों और व्यावसायिक संभावनाओं के बारे में समझाया गया।

इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के पॉटेड पौधों, ग्रोइंग मीडिया और उनके उचित प्रबंधन के साथ-साथ घरों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों के लैंडस्केपिंग में फूलदार एवं सजावटी पौधों के उपयोग के बारे में भी प्रशिक्षित किया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों द्वारा रोपण सामग्री, विपणन और फूलों के बाजार से जुड़े विभिन्न प्रश्नों के संतोषजनक समाधान दिए।

इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में अखिल भारतीय पंचायत परिषद, हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष बलदेव ठाकुर; ग्राम पंचायत शमरोड़ के प्रधान राम गोपाल; ग्राम पंचायत कोटला पंजोला की प्रधान नीमा देवी सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।

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