मंडी: हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने तथा किसानों को रसायनमुक्त कृषि की ओर प्रेरित करने के राज्य सरकार के प्रयास धरातल पर रंग ला रहे हैं। प्राकृतिक फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई ऐतिहासिक बढ़ोतरी से किसानों का रुझान इस पद्धति की ओर तेजी से बढ़ा है। मंडी जिला में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत तैयार की गई व्यापक कार्य योजना से हजारों किसान आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

मंडी जिला में वर्तमान में 48,380 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं और 8,400 हेक्टेयर भूमि को इस खेती के अंतर्गत लाया जा चुका है। वर्ष 2025-26 के दौरान 2,500 हेक्टेयर क्षेत्र, 50 क्लस्टर तथा 8,214 किसानों को इस योजना से जोड़ा गया, जबकि वर्ष 2026-27 में 1,000 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि, 20 नए क्लस्टर तथा 2,500 नए किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि विभाग द्वारा बीते दो वर्षों में एमएसपी के तहत 1040.81 क्विंटल मक्का, 644.24 क्विंटल गेहूं तथा लगभग 233 क्विंटल हल्दी की सरकारी खरीद की जा चुकी है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिला है।
राज्य सरकार द्वारा एमएसपी में की गई वृद्धि किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई है। गांव घांघल के किसान प्रताप सिंह ने बताया कि पहले उन्हें गेहूं 60 रुपये प्रति किलोग्राम मिलता था जो अब बढ़कर 80 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है, वहीं मक्की के दाम भी 40 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं। सुंदरनगर तहसील के गांव ढंडोल के किसान मस्तराम ने 5 बीघा भूमि पर खेती कर 65 हजार रुपये का गेहूं और 25 हजार रुपये की मक्की सरकार को बेची। उन्होंने बताया कि हल्दी का समर्थन मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किए जाने से किसानों को बहुत बड़ा आर्थिक संबल मिला है।
वर्ष 2026-27 के लिए जिला में 4.93 करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। इसके अंतर्गत 14 विकास खंडों के 20 नए क्लस्टरों के लिए नए कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) का चयन किया गया है, जो किसानों को खेतों में जाकर प्रशिक्षित करेंगे। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर जीवामृत और घन जीवामृत जैसे जैविक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला में 13 बायो रिसोर्स सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
उप परियोजना निदेशक (आत्मा) मंडी हितेंद्र कुमार के अनुसार प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को स्वदेशी नस्ल की गाय खरीदने पर 25 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके साथ ही गोमूत्र संग्रहण के लिए गौशाला का फर्श पक्का करने को 8 हजार रुपये तथा जीवामृत तैयार करने के लिए तीन ड्रमों पर 2,250 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। किसानों को प्राकृतिक खेती का निःशुल्क प्रशिक्षण, किट तथा तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की इस पहल से प्राकृतिक खेती अब केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि एक लाभकारी कृषि व्यवसाय के रूप में उभर रही है।