शिमला : हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेकर की जा रही एक नई तरह की डिजिटल ठगी को लेकर जनता के लिए अलर्ट जारी किया है। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी अब एआई वॉइस क्लोनिंग तकनीक का गलत इस्तेमाल करके लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इसके तहत साइबर ठग परिवार के किसी सदस्य, बच्चे या रिश्तेदार की बिल्कुल असली जैसी आवाज बनाकर किसी अज्ञात या संदिग्ध नंबर से फोन करते हैं और “मम्मी… पापा… मेरा एक्सीडेंट हो गया है, जल्दी पैसे भेजो!” जैसी घबराहट भरी बातें कहकर तुरंत ऑनलाइन पैसे भेजने का दबाव बनाते हैं।
पुलिस ने अपनी एडवाइजरी में स्पष्ट किया है कि ऐसे गिरोह पीड़िता को मानसिक रूप से विचलित करने के लिए एक्सीडेंट, मेडिकल इमरजेंसी या पुलिस हिरासत जैसी झूठी कहानियां गढ़ते हैं। आवाज में रोने या घबराहट का पुट होने के कारण लोग जल्दबाजी में बिना सोचे-समझे पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। ठग सोशल मीडिया या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से उपलब्ध ऑडियो क्लिप्स की मदद से कुछ ही सेकंड में किसी की भी आवाज का क्लोन (हूबहू नकली आवाज) तैयार कर लेते हैं।

हिमाचल पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि ऐसी किसी भी घबराहट भरी या आपातकालीन कॉल आने पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें और सबसे पहले धैर्य बनाए रखें। किसी भी खाते में पैसे भेजने से पहले कॉल काटें और उस व्यक्ति के पूर्व-परिचित अथवा आधिकारिक (known) नंबर पर खुद कॉल करके स्थिति की पूरी तरह से पुष्टि करें। अगर वह व्यक्ति फोन न उठाए, तो उनके पास मौजूद किसी अन्य दोस्त, सहकर्मी या रिश्तेदार से संपर्क करके घटना का वेरिफिकेशन ज़रूर करें।
यदि आप या आपके आसपास का कोई व्यक्ति इस तरह के साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाता है, तो बिना कोई समय गंवाए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा नागरिक केंद्रीय साइबर अपराध पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शुरुआती घंटों में शिकायत दर्ज कराने से ठगी की गई राशि को फ्रीज कराने में मदद मिलती है।