डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में मनाया गया विश्व ओजोन दिवस

Photo of author

By Hills Post

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कृषि मौसम विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के स्पेस क्लब द्वारा हाल ही में विश्व ओजोन दिवस के उपलक्ष्य पर विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का भव्य आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के माई भारत कार्यक्रम के सक्रिय सहयोग से संपन्न हुआ।

इस वर्ष की थीम और उद्देश्य

इस वर्ष विश्व ओजोन दिवस की मुख्य थीम ग्लोबल एक्शन फॉर अ कूलर प्लैनेट रखी गई थी। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को ओजोन परत के अत्यधिक महत्व, ओजोन क्षरण के गंभीर पर्यावरणीय प्रभावों तथा पृथ्वी के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की अनिवार्यता के प्रति जागरूक करना था।

कुलपति प्रो. एचएस बवेजा का संबोधन

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने आधुनिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक सही संतुलन बनाए रखने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक एवं तकनीकी प्रगति के साथ-साथ जिम्मेदार पर्यावरणीय व्यवहार भी उतना ही आवश्यक है, ताकि हमारे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

प्रो. बवेजा ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संस्थानों की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाएं और अपने-अपने समुदायों में पर्यावरण जागरूकता के सच्चे दूत बनें। इसके अलावा, उन्होंने उभरती हुई पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और शिक्षा की भूमिका को रेखांकित किया।

कृषि मौसम विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. पी.के. बवेजा ने स्वागत भाषण देते हुए विश्व ओजोन दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और ओजोन परत के संरक्षण में इसके वैश्विक योगदान की जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने किगाली संशोधन की 10वीं वर्षगांठ के महत्व का जिक्र करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) को चरणबद्ध तरीके से कम करके जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटना है।

डॉ. सी.एल. ठाकुर ने व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए दैनिक जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी आदतें मिलकर बड़ा बदलाव लाती हैं। डॉ. कुमार अम्बरीश भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के अतिरिक्त निदेशक ने ओजोन क्षरण और इससे जुड़े जलवायु बदलावों के पर्वतीय व अल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि अल्पाइन वनस्पतियां और औषधीय पौधे पर्यावरण में बदलाव के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं।

भूपिंदर गिल जिला युवा अधिकारी ने माई भारत कार्यक्रम के तहत युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी और विद्यार्थियों में नेतृत्व, संचार कौशल व सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने पर जोर दिया।

प्रतियोगिताओं के परिणाम और जागरूकता रैली

कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से क्विज और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। क्विज प्रतियोगिता में टीम यूवी गार्ड्स ने प्रथम स्थान तथा टीम इकोमाइंड्स ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता में पी.एच.डी. प्रथम वर्ष की छात्रा श्रिष्टि शर्मा ने प्रथम स्थान और एमएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा प्रकृति ने द्वितीय स्थान हासिल किया।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने विश्वविद्यालय परिसर में एक भव्य जागरूकता रैली भी निकाली, जिसके माध्यम से ओजोन संरक्षण का संदेश आम जन तक पहुंचाया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वैधानिक अधिकारी, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, शिक्षक, विद्यार्थी और स्पेस क्लब के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

Photo of author

Hills Post

हम उन लोगों और विषयों के बारे में लिखने और आवाज़ बुलंद करने का प्रयास करते हैं जिन्हे मुख्यधारा के मीडिया में कम प्राथमिकता मिलती है ।