शूलिनी यूनिवर्सिटी के योगानंद स्कूल ऑफ़ स्पिरिचुअलिटी एंड हैप्पीनेस को मिली इंडियन योग एसोसिएशन की मान्यता

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By Hills Post

सोलन: शूलिनी यूनिवर्सिटी के योगानंद स्कूल ऑफ़ स्पिरिचुअलिटी एंड हैप्पीनेस के लिए यह एक अत्यंत गौरवशाली उपलब्धि है कि इसे भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली प्रतिष्ठित संस्था इंडियन योग एसोसिएशनके एसोसिएट सेंटर की आधिकारिक मान्यता मिल गई है। इस मान्यता के मिलने से योग, आध्यात्मिकता, उच्च शोध और समग्र मानवीय कल्याण के साथ विश्वविद्यालय का शैक्षणिक जुड़ाव और अधिक सुदृढ़ हुआ है।

राष्ट्रीय मंच से जुड़ाव और अकादमिक लाभ

इस मान्यता के माध्यम से YSSH अब सीधे तौर पर इंडियन योग एसोसिएशन से जुड़ गया है, जो कि एक प्रमुख राष्ट्रीय मंच है और देश भर के योग संस्थानों, योग साधकों, शिक्षकों तथा शोधकर्ताओं को एक मंच पर एकजुट करता है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह एसोसिएशन अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण, कार्यशालाओं, सेमिनारों और आपसी सहयोग के जरिए YSSH की अकादमिक एवं अनुभव-आधारित पहलों को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा।

इसके अलावा, YSSH के प्रोफेसर (डॉ.) निधीश कुमार यादव और असिस्टेंट प्रोफेसर रमा मिश्रा पहले से ही इंडियन योग एसोसिएशन के आजीवन सदस्य हैं, जिनके इस अकादमिक जुड़ाव से संस्थान को देश भर के जाने-माने योग विद्वानों और शोध संस्थानों के साथ सीधे संपर्क स्थापित करने में बड़ी मदद मिलेगी। शूलिनी यूनिवर्सिटी के छात्र अब इस राष्ट्रीय मंच के जरिए व्यापक योग समुदाय से जुड़ सकेंगे, जिससे उन्हें योग के विभिन्न तरीकों, नई कार्यप्रणालियों और शोध के आधुनिक आयामों को नजदीक से जानने के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे।

पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संगम

योगानंद स्कूल ऑफ़ स्पिरिचुअलिटी एंड हैप्पीनेस के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर (डॉ.) निधीश कुमार यादव ने इस उपलब्धि पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस मान्यता से भारत के प्राचीन पारंपरिक योग ज्ञान को आज के आधुनिक अकादमिक और वैज्ञानिक नजरिए से जोड़ने में बहुत मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि यह स्कूल योग को केवल शारीरिक व्यायाम या आसनों तक सीमित न रखकर, इसे एक ऐसे व्यापक विषय के रूप में प्रस्तुत करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है जो मानसिक कल्याण, भावनात्मक संतुलन, आंतरिक लचीलेपन, माइंडफुलनेस (सचेतनता), आध्यात्मिकता और समग्र मानवीय विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैला हुआ है।

प्रोफेसर यादव ने आगे कहा कि YSSH का मुख्य फोकस योग के क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित और अंतर-विषयी शोध पर रहेगा। इसके तहत योग को मनोविज्ञान, शरीर विज्ञान, न्यूरोसाइंस, स्वास्थ्य, वेलनेस और मानवीय प्रदर्शन जैसे विषयों के साथ जोड़ने वाले शोध अध्ययनों को बढ़ावा दिया जाएगा। स्कूल की योजना अपनी शैक्षिक और प्रायोगिक पहलों को और अधिक मजबूत करने की है, ताकि छात्र योग के पारंपरिक मूलाधार और इसके आधुनिक वैज्ञानिक उपयोग दोनों को गहराई से समझ सकें।

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