नाहन : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) सिरमौर द्वारा आज नाहन में कोर्ट स्टाफ के लिए साइबर धोखाधड़ी और तेजी से बढ़ते ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों से बचाव हेतु एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिरमौर के सचिव श्री नव कमल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। शिविर का मुख्य उद्देश्य अदालत के कर्मचारियों को साइबर अपराध के नए हथकंडों के प्रति सतर्क करना और सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी देना था।
शिविर के दौरान पुलिस विभाग के साइबर अपराध विशेषज्ञों ने नाहन कोर्ट स्टाफ को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट के तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से जागरूक किया। विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई , प्रवर्तन निदेशालय या अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों का फर्जी अधिकारी बताकर आम लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ये अपराधी वीडियो कॉल के जरिए लोगों को झूठे मामलों में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे भारी रकम ऐंठते हैं।

कार्यक्रम में साइबर विशेषज्ञों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय कानून प्रणाली में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान या कानूनी प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस विभाग किसी भी व्यक्ति को वीडियो कॉल के माध्यम से गिरफ्तार नहीं करता। इसके साथ ही कर्मचारियों को हिदायत दी गई कि वे कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, ओटीपी या कोई भी व्यक्तिगत विवरण साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
इस अवसर पर DLSA सिरमौर के सचिव नव कमल ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि साइबर अपराधी दिन-प्रतिदिन ठगी के नए और आधुनिक तरीके अपना रहे हैं, जिससे बचाव का सबसे कारगर और एकमात्र उपाय सतर्कता व जागरूकता ही है। उन्होंने कोर्ट स्टाफ से अपील की कि वे इस शिविर में सीखे गए सुरक्षा मंत्रों को न केवल स्वयं तक सीमित रखें, बल्कि अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों के साथ भी साझा करें ताकि अधिक से अधिक लोगों को साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बचाया जा सके।
शिविर के अंतिम चरण में एक प्रश्नोत्तरी सत्र का आयोजन भी किया गया, जिसमें नाहन कोर्ट स्टाफ के सदस्यों ने साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े अपने विभिन्न सवाल पूछे। पुलिस विभाग से आए विशेषज्ञों ने कर्मचारियों की सभी शंकाओं का तार्किक और संतोषजनक समाधान प्रस्तुत किया। यह शिविर अदालती कर्मचारियों को साइबर दुनिया के खतरों के प्रति मुस्तैद करने में काफी मददगार साबित हुआ।