सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के खेल परिसर में रविवार को ’12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ बेहद उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों, एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस तथा स्काउट्स एवं गाइड्स के स्वयंसेवकों सहित 250 से अधिक लोगों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। कार्यक्रम में इस वर्ष की वैश्विक थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ पर विशेष जोर दिया गया, जो जीवन भर शारीरिक स्फूर्ति, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक दृढ़ता बनाए रखने में योग की वैज्ञानिक भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित करती है। इस गरिमामयी कार्यक्रम में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया) की टीम ने भी विशेष रूप से सहभागिता की।

विश्वविद्यालय के ‘योगानंद स्कूल ऑफ स्पिरिचुअलिटी एंड हैप्पीनेस’ के विशेषज्ञों द्वारा खेल परिसर में एक घंटे के विशेष योग एवं ध्यान (मेडिटेशन) सत्र का सफल संचालन किया गया। योग सत्र का नेतृत्व करने वाले इस विशेषज्ञ दल में विभागाध्यक्ष डॉ. निधीश यादव सहित संकाय सदस्य डॉ. रमा मिश्रा और गौतम साहू शामिल रहे। विशेषज्ञों ने इस दौरान योग, अध्यात्म और सरल जीवनशैली से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वस्थ आहार, पर्याप्त नींद तथा अपनी आंतरिक ऊर्जा को सही व सार्थक लक्ष्यों की ओर निर्देशित करने के महत्व पर बल दिया। विशेषज्ञों ने सामूहिक संदेश देते हुए कहा कि योग केवल कोई शारीरिक व्यायाम मात्र नहीं है, बल्कि यह एक समग्र जीवन पद्धति है जो इंसान के शरीर, मन और आत्मा के बीच एक आदर्श सामंजस्य स्थापित करती है।
इससे पूर्व, कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों का औपचारिक स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के ऐतिहासिक महत्व एवं इसकी उत्पत्ति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक जीवनशैली ने जहां मानव जीवन को बेहद सुविधाजनक बनाया है, वहीं दूसरी ओर तनाव, अवसाद एवं जीवनशैली से जुड़ी अनेक नई बीमारियों को भी जन्म दिया है। इस वर्ष की थीम का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए डॉ. वैद्य ने कहा कि नियमित योगाभ्यास सभी आयु वर्ग के लोगों को दीर्घकाल तक स्वस्थ रहने, शरीर की लचक व रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने तथा मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने में अचूक सहायता करता है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार और समाज के सभी वर्गों से एक स्वस्थ, समृद्ध एवं तनावमुक्त जीवन के लिए योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का एक अनिवार्य हिस्सा बनाने का पुरजोर आह्वान किया।
सत्र के दौरान उपस्थित सभी साधकों और प्रतिभागियों को विभिन्न योगासनों व प्राणायामों की सही वैज्ञानिक विधियों तथा उनसे शरीर को होने वाले तात्कालिक व दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभों की व्यावहारिक जानकारी दी गई। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों को स्वस्थ, सक्रिय और दीर्घायु जीवन के लिए योग को आजीवन अपनाने का संकल्प दिलाने के साथ हुआ। कार्यक्रम के अंतिम चरण में डीन छात्र कल्याण (SWO) डॉ. डी.आर. भारद्वाज ने मुख्य अतिथियों, योग विशेषज्ञों और सभी प्रतिभागियों का इस आयोजन को सफल बनाने के लिए औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।