नौणी विश्वविद्यालय ने अनुसंधान और विस्तार के लिए तैयार किया रोडमैप

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By Hills Post

सोलन: नौणी विश्वविद्यालय, सोलन ने अपनी अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों को सुदृढ़ करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। इस रोडमैप का मुख्य उद्देश्य जलवायु-सक्षम बागवानी, किसान-केंद्रित तकनीकों, फसल विविधीकरण, डिजिटल विस्तार और अनुसंधान की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दृश्यता बढ़ाना है। इस रणनीति पर विश्वविद्यालय की 28वीं अनुसंधान परिषद और 26वीं विस्तार परिषद की संयुक्त बैठकों में विस्तार से चर्चा की गई, जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बवेजा ने की। इन बैठकों में कृषि, बागवानी व वन विभागों के अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।

निदेशक विस्तार डॉ. डी.पी. शर्मा ने बताया कि विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, रोग निदान यात्राओं और डिजिटल माध्यमों के जरिए पिछले 10 महीनों में 33,000 से ज्यादा किसानों को विश्वविद्यालय से जोड़ा गया है। वहीं निदेशक अनुसंधान डॉ. देविना वैद्य के अनुसार, विश्वविद्यालय ने पिछले 10 महीनों में 11.58 करोड़ रुपये की लागत वाली 29 नई अनुसंधान परियोजनाएं हासिल की हैं। इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों और फसल प्रबंधन पर विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए तकनीकी वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों किसानों द्वारा नियमित रूप से देखे जा रहे हैं।

कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बवेजा ने कहा कि विश्वविद्यालय की भावी प्रणाली किसान-केंद्रित, जलवायु-सक्षम और नवाचार-आधारित होगी। बदलती जलवायु को देखते हुए एवोकाडो, कीवी, बेरीज, नट्स और ड्रैगन फ्रूट जैसी उभरती फसलों की वैज्ञानिक संभावनाओं और जल-दक्ष उत्पादन प्रणालियों पर शोध किया जाएगा। इसके साथ ही बायोचार, पाइन ब्रिकेटिंग, लहसुन प्रसंस्करण, पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन और खाद्य प्रसंस्करण जैसी वेस्ट टू वेल्थ तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

किसानों को सटीक व समयबद्ध परामर्श देने के लिए मोबाइल ऐप, एआई आधारित रोग निदान प्रणालियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाया जाएगा। विश्वविद्यालय का मुख्य ध्येय अनुसंधान को नवाचार और पेटेंट में बदलकर सीधे किसानों व उद्योगों तक पहुंचाना है। इस बैठक में पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि, सोलन के वन व कृषि विभागों के उच्च अधिकारी और कई प्रगतिशील किसान भी उपस्थित रहे।

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