नाहन : धौलाकुआं स्थित भारतीय प्रबंध संस्थान सिरमौर में बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के 19 वर्षीय छात्र प्रभात शुक्ला की आत्महत्या के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। पोस्टमार्टम के बाद पांवटा साहिब श्मशान घाट पर छात्र का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान परिजनों ने मीडिया के समक्ष संस्थान प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही और जानकारी छुपाने के आरोप लगाए हैं। परिजन अब संस्थान प्रशासन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की तैयारी कर रहे हैं।
मृतक छात्र अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत मृतक के चाचा श्याम शुक्ला और मां ने रोते हुए संस्थान पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि छात्र की मौत की जानकारी संस्थान प्रबंधन ने समय पर नहीं दी। जब छात्र के पिता ने जबलपुर से हॉस्टल वार्डन को फोन कर बेटे द्वारा फोन न उठाने की बात कही, तब जाकर कमरे की खिड़की तोड़कर देखा गया। परिजनों का आरोप है कि घटना से 24 घंटे पहले ही छात्र की मौत हो चुकी थी, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।

परिजन का सबसे बड़ा आरोप यह है कि आत्महत्या से तीन दिन पहले भी छात्र ने अपने हाथ की नस काटने का प्रयास किया था, जिसके बाद उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया था। परिजनों का कहना है कि संस्थान प्रबंधन ने इतनी बड़ी घटना को उनसे छुपाया और परिजनों को सूचित नहीं किया। यदि समय रहते उन्हें इस बात की जानकारी दी जाती, तो वे आकर बच्चे की काउंसलिंग करवाते और उसकी जान बच सकती थी।
मां और परिजनों का आरोप है कि 2024 में दाखिले के समय छात्र पूरी तरह स्वस्थ था, लेकिन संस्थान में अन्य छात्रों द्वारा बुलिंग और मानसिक प्रताड़ना के कारण वह डिप्रेशन का शिकार हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों और प्रशासन से शिकायत के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, बल्कि मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
परिजनों ने पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों (कुलदीप व इंद्रजीत) की मुस्तैदी और पारदर्शिता की सराहना की, जिन्होंने परिजनों को सही स्थिति से अवगत कराया। परिजनों ने बताया कि पुलिस ने छात्र का मोबाइल और लैपटॉप कब्जे में ले लिया है।
मामले की जानकारी देते हुए डीएसपी पांवटा साहिब मानवेन्द्र ठाकुर ने बताया कि मृतक छात्र के परिजनों ने पुलिस को लिखित आवेदन सौंपा है। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और दी गई शिकायत के आधार पर पुलिस गहनता से तथ्यों की जांच कर रही है और वर्तमान में संस्थान प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने पर विचार किया जा रहा है।