शिमला : “नौकरी तो बहुत से लोग करते हैं, लेकिन कुछ लोग अपनी ड्यूटी को ही अपना जुनून बना लेते हैं।” ऐसे ही एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी अधिकारी हैं राजेश शर्मा, जो वर्तमान में जिला कुल्लू में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मूल रूप से जिला बिलासपुर की सीमा (3 किलोमीटर के दायरे) के रहने वाले राजेश शर्मा की कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी है-जिसमें देश सेवा का जज्बा भी है, पहाड़ों को नापने का एडवेंचर भी, और बेजुबान जीवों की जान बचाने का साहसिक अभियान भी।
सेना से शुरू हुआ सफर, फिर संभाली वनों की कमान
हिल्स पोस्ट’ के साथ खास बातचीत में उन्होंने अपने जीवन, करियर और अनुभवों के कई दिलचस्प पहलुओं को साझा किया। उनके करियर की शुरुआत देश की आन-बान-शान भारतीय सेना (Indian Army) से हुई थी, जिसे उन्होंने साल 1996 में जॉइन किया था। सेना में वे बतौर इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक (टेक्निकल ट्रेड) कार्यरत थे। साल 2001 तक देश सेवा करने के बाद वहां से वॉलंटरी डिस्चार्ज (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेकर उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। इसके बाद साल 2006 में उन्होंने ‘एचपी स्टेट कोऑपरेटिव बैंक’ में बतौर क्लर्क अपनी सेवाएं दीं। लेकिन उनके इरादे कुछ और बड़ा करने के थे। नौकरी के साथ-साथ वे लगातार प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी करते रहे और आखिरकार साल 2008 में उनका चयन हिमाचल प्रदेश फॉरेस्ट सर्विसेज (HPFS) में हो गया।

वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी और खतरों से भरे ट्रैक्स का शौक
फॉरेस्ट सर्विस की ट्रेनिंग के दौरान राजेश शर्मा का झुकाव वाइल्डलाइफ (वन्यजीव) की तरफ बढ़ा। उन्होंने अपने शौक की शुरुआत बर्डिंग (पक्षियों को निहारने) से की, जो धीरे-धीरे वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी में बदल गया। पहाड़ों से उनका प्रेम इतना गहरा है कि उन्होंने हिमाचल के सबसे कठिन और ऊंचे दर्रों (Passes) को ट्रैकिंग के जरिए फतह किया है। इनमें भावा पास, परांगला पास और पिन पार्वती पास जैसे बेहद दुर्गम और लंबे ट्रैक्स शामिल हैं। शिमला पोस्टिंग के दौरान उन्होंने प्रसिद्ध चूड़धार पीक को भी सभी रास्तों से एक्सप्लोर किया।
हिमाचल के ‘स्नेक मैन’: 150 से अधिक सांपों का कर चुके हैं रेस्क्यू
राजेश शर्मा की एक और बड़ी पहचान ‘स्नेक रेस्क्यूअर’ के रूप में है। उन्होंने बताया कि समाज में सांपों को लेकर बहुत डर और अवेयरनेस की कमी है। इसी डर को दूर करने के लिए उन्होंने सांपों के व्यवहार का अध्ययन किया। उन्होंने बताया कि “हमारे देश में जमीन पर रहने वाले 90% सांप जहरीले नहीं होते। हिमाचल के संदर्भ में केवल कोबरा, रसेल वाइपर और कॉमन करैत जैसे 3-4 सांप ही अत्यधिक जहरीले हैं, बाकी बिल्कुल बेअसर हैं।”
शिमला पोस्टिंग के दौरान जब उनके पास सांप निकलने की पहली शिकायत आई, तो उन्होंने खुद आगे बढ़कर रेस्क्यू किया। इसके बाद तो उनका नंबर पूरे क्षेत्र में फैल गया। वे अब तक 150 से ज्यादा सफल स्नेक रेस्क्यू ऑपरेशंस कर चुके हैं। अब स्थिति यह है कि वन विभाग के ट्रेनिंग स्कूल और वेटरनरी कॉलेज में भी उन्हें युवाओं को ट्रेनिंग देने के लिए बुलाया जाता है।
सांपों को लेकर आम जनता को खास संदेश
अक्सर लोग सांप को देखते ही मार देते हैं, इस पर चिंता जताते हुए राजेश शर्मा ने कहा, “सांप कभी भी इंसान को खुद से काटने नहीं आता। उसे इंसानों में कोई दिलचस्पी नहीं है, वह सिर्फ अपना बचाव करना चाहता है। हादसे तभी होते हैं जब अनजाने में उस पर पैर पड़ जाए या कोई उसे छेड़े।” उन्होंने युवाओं और वन विभाग के कर्मचारियों से अपील की कि वे सांपों के बारे में अध्ययन करें, ज़हरीले और बिना ज़हर वाले सांपों का अंतर समझें और बेजुबान जीवों की रक्षा करें।
प्रकृति प्रेमी है पूरा परिवार
जब उनसे उनके परिवार के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया कि उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी साइकोलॉजी (Psychology) में ग्रेजुएशन कर रही है। खास बात यह है कि पिता की तरह ही पूरा परिवार प्रकृति प्रेमी है। सरकारी आवास के चारों तरफ पक्षियों के लिए पानी रखने का जिम्मा घर के सदस्यों ने ही संभाल रखा है, जहां हर दिन अलग-अलग प्रजातियों के पक्षी आते हैं।
नौकरी के साथ-साथ अपनी हॉबी को समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण का जरिया बनाने वाले राजेश शर्मा जैसे अधिकारी युवाओं के लिए एक सच्चे रोल मॉडल हैं। हिल्स पोस्ट टीम उनके इस जज्बे को सलाम करती है।