शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोमवार देर शाम जनजातीय विकास और बागवानी विभागों की एक अहम समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति सुधारना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार रसायन मुक्त कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य भी दे रही है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बागवानी विभाग को हर संभव मदद देने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि किसानों और बागवानों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए विभाग में खाली पड़े पदों को जल्द भरा जाएगा।
फलों की नई किस्मों और तकनीक पर ध्यान देने की जरूरत
एचपी-शिवा परियोजना की प्रगति देखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु और भूगोल के हिसाब से बागवानी में विविधता लाना बेहद जरूरी है। चूंकि बागवानी हिमाचल की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है, इसलिए विभाग को बागवानों को बेहतर तकनीकी सहायता देनी चाहिए ताकि उनकी आमदनी बढ़ सके।
इसके साथ ही उन्होंने जनजातीय विकास विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की और अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बताया कि मार्च 2023 से मार्च 2026 के बीच वन अधिकार अधिनियम के तहत 636 व्यक्तिगत और 20 सामुदायिक दावों को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 2259.24 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित की जा चुकी है।
बैठक में निचार, पांगी, भरमौर और लाहौल के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं को भी परखा गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इन स्कूलों में पढ़ रहे 1013 विद्यार्थियों को बेहतरीन सुविधाएं मिलनी चाहिए।
इस बैठक में बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा, सचिव सी. पालरासू और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।