शिमला: सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीईटी (TET) की अनिवार्यता से संबंधित निर्णय दिए जाने के लगभग एक वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा टीईटी प्रभावित सेवारत शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी का आयोजन नहीं किया जा सका है। इस स्थिति के चलते प्रदेश के हजारों सेवारत शिक्षकों में सरकार के प्रति रोष लगातार बढ़ता जा रहा है। TET प्रभावित शिक्षक मोर्चा, हिमाचल प्रदेश ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार से मांग की है कि आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब और उत्तर प्रदेश राज्यों की तर्ज पर हिमाचल में भी प्रभावित सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी का आयोजन किया जाए।

मोर्चा ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी की आवश्यकता को स्पष्ट किया है तथा ऐसे शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करने का अवसर उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में प्रदेश सरकार का यह नैतिक और प्रशासनिक दायित्व बनता है कि वह प्रभावित शिक्षकों को पर्याप्त अवसर प्रदान करने के लिए विशेष टीईटी आयोजित करे।
मोर्चा के प्रतिनिधियों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में हजारों ऐसे शिक्षक हैं जो पिछले कई वर्षों से सरकारी विद्यालयों में अपनी निष्ठापूर्ण सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से अधिकांश शिक्षक ऐसे समय में नियुक्त हुए थे जब टीईटी की वर्तमान व्यवस्था लागू नहीं थी। इसलिए सरकार को इन शिक्षकों के लंबे सेवाकाल और अनुभव को देखते हुए मानवीय व व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
मोर्चा ने इस बात पर जोर दिया है कि जब आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य अपने प्रभावित और सेवारत शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए विशेष अवसर प्रदान कर रहे हैं, तो हिमाचल प्रदेश सरकार को भी उसी तर्ज पर कदम उठाते हुए हजारों शिक्षकों को राहत देनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मांग सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की अवहेलना करने के लिए नहीं है, बल्कि अदालत द्वारा निर्धारित व्यवस्था के दायरे में रहकर ही प्रभावित शिक्षकों को टीईटी पास करने का प्रभावी अवसर उपलब्ध कराने के लिए है।
प्रदेशाध्यक्ष नरेश ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में टीईटी प्रभावित सेवारत शिक्षकों के लिए अविलंब Special TET आयोजित किया जाए। स्पेशल टीईटी की परीक्षा तिथि और इसका विस्तृत कार्यक्रम शीघ्र घोषित कर आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाए। सितंबर 2028 से पहले के नियमों के तहत प्रभावित शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध करवाए जाएं, ताकि उनके भविष्य और करियर पर कोई संकट न आए।
मोर्चा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरमेश लाल शर्मा ने कहा कि वर्षों से निष्ठापूर्वक सेवाएं दे रहे शिक्षकों के अनुभव और उनकी सेवा अवधि को पूरी गंभीरता से लेते हुए सरकार को सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए। वहीं, प्रदेशाध्यक्ष नरेश ठाकुर ने कड़े शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश के अन्य राज्य अपने सेवारत शिक्षकों को विशेष अवसर और राहत दे सकते हैं, तो फिर हिमाचल प्रदेश के टीईटी प्रभावित शिक्षकों के साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है?