नाहन : सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन के ऐतिहासिक चौगान मैदान में आयोजित होने वाले मेलों और व्यापारिक गतिविधियों को लेकर अब व्यापक स्तर पर विरोध और सवाल उठने लगे हैं। भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और नाहन के स्थानीय व्यापारियों ने चौगान मैदान में व्यावसायिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग बुलंद की है। इसी कड़ी में आज युवाओं ने शहर में रोष रैली निकालकर जिला उपायुक्त (DC) कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर स्थानीय व्यापारियों ने भी उपायुक्त से मुलाकात कर चौगान में व्यापारिक गतिविधियां बंद करवाने का आग्रह किया।
पहाड़ी शिवालिक जनकल्याण संगठन के बैनर तले आयोजित इस रोष रैली में बड़ी संख्या में भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं ने भाग लिया। युवाओं का कहना है कि चौगान मैदान में लगातार मेलों और व्यावसायिक गतिविधियों के आयोजन के कारण उन्हें शारीरिक अभ्यास और दौड़-धूप करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारी युवाओं ने मांग रखी कि चौगान मैदान का उपयोग केवल खेल गतिविधियों के लिए किया जाए और यहां मेलों के आयोजन पर तुरंत रोक लगाई जाए। इसके साथ ही युवाओं ने विकल्प के तौर पर ‘चम्बा मैदान’ को सुबह 3 बजे से रात 9 बजे तक खुला रखने की मांग की, ताकि अभ्यास करने वाले युवा समय पर अपना शारीरिक अभ्यास कर सकें। युवाओं का आरोप है कि वर्तमान में इस मैदान को समय पर नहीं खोला जा रहा है।

चौगान मैदान में आयोजित होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्थानीय व्यापारियों ने भी गहरा रोष प्रकट किया है। व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और मैदान में व्यापारिक गतिविधियां तुरंत बंद करवाने की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि चौगान मैदान में बार-बार लगने वाले मेलों और अस्थाई दुकानों के कारण शहर के मुख्य बाजार का स्थानीय कारोबार बुरी तरह प्रभावित होता है। ऐसे में ऐतिहासिक मैदान में व्यावसायिक गतिविधियों के बजाय खेलकूद और सार्वजनिक गतिविधियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पहाड़ी शिवालिक जनकल्याण संगठन के अध्यक्ष योगी ठाकुर ने बताया कि क्षेत्र के युवा पिछले लंबे समय से इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। संगठन के माध्यम से जिला प्रशासन को कई बार इस समस्या के समाधान के लिए अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन स्थानीय प्रशासन युवाओं की मांग को लेकर जरा भी गंभीर नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक उदासीनता का खामियाजा उन युवाओं को भुगतना पड़ रहा है जो दिन-रात देश की सेवा और सेना/पुलिस भर्तियों के लिए कड़ा अभ्यास कर रहे हैं। युवाओं और व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।