नौणी यूनिवर्सिटी के नेरी कॉलेज में देश का अत्याधुनिक बायोचार अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र शुरू

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By Hills Post

सोलन: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, नेरी में अत्याधुनिक बायोचार अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र सतत बायोमास प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन शमन तथा कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन एवं मृदा स्वास्थ्य पर अनुसंधान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक पहल है।

इस केंद्र की स्थापना चेन्नई स्थित प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पिछले वर्ष विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश वन विभाग के बीच पिछले वर्ष हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओए) के अंतर्गत की गई है। इस पहल का उद्देश्य वन बायोमास के वैज्ञानिक उपयोग के माध्यम से जंगलों में आग की घटनाओं के जोखिम को कम करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना तथा सतत आजीविका और सामुदायिक जागरूकता को प्रोत्साहित करना है।

प्रतिदिन 1.5 टन (टीपीडी) क्षमता वाली बायोचार उत्पादन इकाई का उद्घाटन गत सप्ताह भोरंज के विधायक सुरेश कुमार ने हिमाचल प्रदेश सरकार के पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला, वन संरक्षक निशांत मंडोत्रा, उद्यान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, परियोजना को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने वाले आईआईटी रुड़की के संकाय सदस्य, नेरी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. रमेश कुमार भारद्वाज और वैज्ञानिक तथा प्रोक्लाइम के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया।

बायोचार बायोमास से नियंत्रित परिस्थितियों में तैयार किया जाने वाला कार्बन-समृद्ध पदार्थ है, जो मृदा की उर्वरता बढ़ाने, जल धारण क्षमता में सुधार करने, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने तथा कार्बन क्रेडिट सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह केंद्र स्थानीय रूप से उपलब्ध बायोमास जैसे चीड़ की पत्तियां, लैंटाना, बांस तथा अन्य अवशेषों का उपयोग कर बायोचार का उत्पादन करेगा, जिसका उपयोग कृषि एवं बागवानी में किया जाएगा। वन बायोमास के उपयोग के माध्यम से जंगलों में आग की घटनाओं के जोखिम को कम करने के साथ-साथ यह केंद्र बायोचार प्रौद्योगिकी एवं कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन जैसे उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान, कौशल विकास तथा विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के उत्कृष्ट अवसर भी प्रदान करेगा।

यह परियोजना सतत बायोमास संग्रहण एवं प्रसंस्करण के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ जलवायु-अनुकूल कृषि एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के अनुसंधान को भी सुदृढ़ करेगी।

समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश वन विभाग सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से सतत बायोमास संग्रहण सुनिश्चित करेगा तथा वन एवं पर्यावरण संबंधी नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करेगा। विश्वविद्यालय नेरी परिसर में इस केंद्र के लिए भूमि उपलब्ध कराएगा तथा कृषि, बागवानी एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार में बायोचार के उपयोग पर अनुसंधान करेगा। वहीं, प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड इस केंद्र की स्थापना, संचालन एवं रखरखाव के साथ-साथ तकनीकी विशेषज्ञता और विपणन संबंधी सहयोग उपलब्ध कराएगी।

नेरी में स्थापित 1.5 टीपीडी क्षमता वाला बायोचार अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र हिमाचल प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्बन ऑफसेट प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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