नाहन : बर्मा पापड़ी क्षेत्र में रून नदी के विकराल उफान के बीच अपनी जान हथेली पर रखकर बुजुर्ग बनारसी दास को सुरक्षित टापू तक पहुंचाने वाले जल शक्ति विभाग के साहसी कर्मचारी अंशुल के अदम्य साहस को अब पूरे प्रदेश में सराहा जा रहा है।
इसी कड़ी में बीते कल शाम लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष नितिन चौहान ने साहसी युवक अंशुल से विशेष मुलाकात की। उन्होंने अंशुल के निवास स्थान पहुंचकर उन्हें हिमाचली टोपी और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा उनके साहस की जमकर सराहना की।

मुलाकात के दौरान लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नितिन चौहान ने कहा कि जब उफनती नदी में कोई उतरने की हिम्मत नहीं कर रहा था, तब अंशुल ने बिना अपनी जान की परवाह किए सैलाब में छलांग लगा दी। अंशुल का यह प्रयास इंसानियत और सेवा भावना की सबसे बड़ी मिसाल है। उनकी इस तत्परता की वजह से ही बुजुर्ग की जान बच सकी।
इस दौरान नितिन चौहान ने गांव के लोगों से भी विस्तार से बातचीत की और क्षेत्र की विभिन्न स्थानीय समस्याओं व जरूरतों के बारे में चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं।
नितिन चौहान ने राज्य सरकार से मांग उठाई है कि ऐसे जांबाज युवाओं के अदम्य साहस को सरकारी स्तर पर पहचान और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रशासन से आग्रह किया कि अंशुल को उनकी इस बहादुरी के लिए राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार (वीरता पदक) से नवाजा जाए, ताकि प्रदेश के अन्य युवाओं को भी निस्वार्थ भाव से समाज और मानव सेवा की प्रेरणा मिल सके।
गौरतलब है कि बीते कल रून नदी के उफान में जब 65 वर्षीय बुजुर्ग बनारसी दास फंस गए थे, तब IPH कर्मचारी अंशुल ने ही सबसे पहले नदी में कूदकर उन्हें सुरक्षित टापू तक पहुंचाया था, जिसके बाद वे खुद भी बुजुर्ग के साथ टापू पर फंस गए थे। करीब तीन घंटे तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में बाद में सेना के हेलिकॉप्टर और NDRF की मदद से सभी को सुरक्षित निकाला गया था।
अंशुल के इस साहस की पूरे सिरमौर जिले में सराहना हो रही है, और राजनीतिक व सामाजिक संगठन लगातार आगे आकर उनका अभिनंदन कर रहे हैं।