शिमला: हिमाचल प्रदेश के खेल इतिहास में एक नया एवं स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रदेश सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा पहली बार रग्बी खेल को स्कूली खेल प्रतियोगिताओं में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है, जिससे राज्य के हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए नए अवसरों के द्वार खुल गए हैं। शिक्षा विभाग की इस ऐतिहासिक पहल से प्रदेश के खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

रग्बी को स्कूली खेलों में मान्यता मिलने के उपरांत शिक्षा विभाग के सौजन्य से अंडर-19 वर्ग की राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन दो अलग-अलग स्थानों पर दो चरणों में किया जाएगा। बालिका वर्ग की प्रतियोगिता 11 से 14 अक्टूबर 2026 तक सिरमौर जिले के शहीद सोहन सिंह मेमोरियल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मानपुर देवड़ा में आयोजित होगी। वहीं, बालक वर्ग की राज्यस्तरीय प्रतियोगिता 16 से 19 अक्टूबर 2026 तक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चम्बा में संपन्न होगी। इन प्रतियोगिताओं में प्रदेश भर के विभिन्न जिलों के खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे, जिससे स्कूल स्तर पर रग्बी को एक नई पहचान मिलेगी।
हिमाचल प्रदेश रग्बी संघ ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए राज्य सरकार तथा शिक्षा विभाग का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस खेल को स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) के दायरे में लाने के लिए सराहनीय प्रयास किए। संघ के अध्यक्ष डॉ. विकास सूद के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश में रग्बी के प्रसार के लिए निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, संघ के महासचिव विशाल सरीन ने शिक्षा विभाग के साथ समन्वय स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाई। महासचिव ने कहा कि रग्बी को हिमाचल के हर जिले, ब्लॉक और स्कूल तक पहुंचाना उनका मुख्य संकल्प है तथा खिलाड़ियों को आधुनिक किट, उत्कृष्ट कोचिंग और प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि संसाधनों के अभाव में कोई प्रतिभा पीछे न छूटे।
इस उपलब्धि को धरातल पर उतारने में संघ के कोषाध्यक्ष एवं तकनीकी चेयरमैन सुधीर कुमार का महत्वपूर्ण तकनीकी योगदान रहा है। इसके साथ ही जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने और खेल को लोकप्रिय बनाने में तकनीकी टीम व प्रशिक्षकों धर्मेंद्र चौधरी, नवप्रीत सिंह, पंकज प्रभाकर, अरविंद कुमार, कु. रूबी, कु. अनीशा, कु. कविता, कु. शिवानी, सुनील तथा नंदलाल सहित अन्य सहयोगियों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। इस निर्णय से प्रदेश के ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों की प्रतिभाओं को भी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता साबित करने का बेहतरीन मंच प्राप्त होगा।